खजुराहो पर जैसा ओशो ने अपने प्रवचनों पर कहा, वैसा उनसे पहले कभी किसी ने नहीं कहा था| खजुराहो के मंदिरों के अध्यात्मिक महत्त्व को ओशो ने ही सबसे पहले रेखांकित किया| उन्होंने ही इस बात पर प्रकाश डाला कि खजुराहो के मंदिरों पर उकेरी गयी मूर्तियाँ बाहरी दीवारों पर ही उकेरी गयीं| अन्दर गर्भगृह में कोई मूर्ति क्यों नहीं है| इन मंदिरों का प्रयोजन क्या था?

खजुराहो पर ओशो और उनके कहे के दशकों बाद सद्गुरु द्वारा कहे कथनों की तुलना लोग स्वयं कर सकते हैं|


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