कह रहा है शोर-ए-दरिया से समुंदर का सुकूतजिस का जितना ज़र्फ़ है उतना ही वो ख़ामोश है ~ नातिक़ लखनवी ये ढाई किलो का हाथ जब किसी पर पड़ता है तो आदमी उठता नहीं उठ जाता है| चिड़ियाघर में पिंजरे... Continue Reading →
कह रहा है शोर-ए-दरिया से समुंदर का सुकूतजिस का जितना ज़र्फ़ है उतना ही वो ख़ामोश है ~ नातिक़ लखनवी ये ढाई किलो का हाथ जब किसी पर पड़ता है तो आदमी उठता नहीं उठ जाता है| चिड़ियाघर में पिंजरे... Continue Reading →
फ़िल्मी दुनिया में व्यवसायिक रूप से अपना असली नाम न रखकर, कोई अन्य नाम रखने की प्रथा पुरानी है| कई बार लोगों ने अपने कठिन लगते नामों को सरल रुप देने वाले नाम रख लिए, कभी उनके नाम वाला ही... Continue Reading →
https://www.youtube.com/embed/DPoE8MS097I?si=LD0ZQzYHdGGpsLTD ...[राकेश]
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