Cemetery of the Nameless : ऑस्ट्रिया की राजधानी वियना में डेन्यूब नदी के किनारे एक ऐसी कब्रगाह है जहाँ ऐसे लोग दफन हैं जो किसी भी कारण से डेन्यूब में डूब कर मर गये और उनके शव नदी की मुख्य धारा से थोड़ा हट कर इस मुहाने... Continue Reading →
पुस्तकें पढने के साथ संगीत सुनना भी ओशो की पसंदीदा रुचियों में से एक रहा| बचपन में कई साल उन्होंने स्वंय बांसुरीवादन किया, लेकिन अपने एक प्रिय मित्र के नदी में डूब जाने के बाद उन्होंने बांसुरी को भी नदी... Continue Reading →
योगेन्द्र यादव के मूल रूप से अंगरेजी में लिखे लेख का हिंदी अनुवाद प्रस्तुत है :- अगर हम आज सकारात्मक राष्ट्रवाद को पुनः प्राप्त करने के लिए कदम बढायें तो बहुतों की निगाह निर्मल वर्मा की वैचारिकी की ओर बिल्कुल... Continue Reading →
प्रिय भारतवासियों, आपसे दो शब्द कहने हैं! हमारे यहाँ मीडिया इतना ऋणात्मक क्यों है? भारत में हम लोग क्यों इतना अटपटा महसूस करते हैं अपनी क्षमताओं और उपलब्धियों को पहचानने में? हम एक महान देश हैं| हमारे पास अद्भुत सफलता की... Continue Reading →
महाराज, प्रणाम, एक शंका का समाधान कीजिये| क्या कोई अमर हो सकता है मृत्युलोक में? नहीं नहीं ! मृत्युंजय कोई नहीं है धरा पर, कभी भी नहीं हुआ, कभी हो नहीं सकता| जो जन्मा है वह मरेगा अवश्य| जन्म और... Continue Reading →
राज खोसला निर्देशित भावनाओं के धरातल पर रचाई फ़िल्म में दो तत्व ही विशेष महत्त्व के हैं| राहुल देव बर्मन द्वारा संगीतबद्ध दो गीत| एक गीत, और क्या अहदे वफ़ा होते हैं, को आशा भोसले और सुरेश वाडकर ने अलग... Continue Reading →
शाहरुख खान के एक विडियो साक्षात्कार/कांफ्रेंस से एक निकाला गया रील नुमा विडियो सोशल मीडिया पर अक्सर ही छाया रहता है जहाँ वे कहते पाए जाते हैं कि उन्होंने अमिताभ बच्चन से पूछा कि सर, स्टेज पर जाने से पहले... Continue Reading →
जीवन में वास्तविक दुःख से घिरा ही न हो तो एक दर्शक, कॉमेडी फ़िल्म को अन्य वर्गों की फिल्मों की तुलना में कभी भी देख सकता है और अक्सर तो कॉमेडी फिल्मों को अन्य वर्गों की फिल्मों पर प्राथमिकता भी... Continue Reading →
मात्र 28 साल जीवित रहीं विश्वव्यापी ख्याति प्राप्त करने वाली अमृता शेरगिल ने सेल्फ-पोर्टेट भी खूब बनाए और अपने न्यूड सेल्फ पोर्ट्रेट भी बनाए| उनके ऐसे कैमरे से खींचे गए चित्र भी थे| उनकी मृत्यु के 19 साल बाद उनकी... Continue Reading →
आदमी को, स्वाभाविक रूप से, एक शाकाहारी होना चाहिए, क्योंकि पूरा शरीर शाकाहारी भोजन के लिए बना है। वैज्ञानिक इस तथ्य को मानते हैं कि मानव शरीर का संपूर्ण ढांचा दिखाता है कि आदमी गैर-शाकाहारी नहीं होना चाहिए। आदमी बंदरों... Continue Reading →
प्रश्न: आपने कहा कि बाह्य आचरण से सब हिंसक हैं। आपने कहा कि बुद्ध और महावीर अहिंसक थे। बुद्ध तो मांस खाते थे, वे अहिंसक कैसे थे? ओशो– मेरा मानना है कि आचरण से अहिंसा उपलब्ध नहीं होती। मैंने यह... Continue Reading →
दिल ना-उमीद तो नहीं नाकाम ही तो हैलम्बी है ग़म की शाम मगर शाम ही तो है (~फ़ैज़ अहमद फ़ैज़) TVF ने ग्रामीण जीवन पर आधारित अपनी वेब श्रंखलाओं में प्रेमचंद और श्रीलाल शुक्ला द्वारा ग्रामीण जीवन पर रचे साहित्य... Continue Reading →
थियेटर और हिंदी सिनेमा जगत के प्रसिद्द लेखक एवं निर्देशक रंजीत कपूर कुछ अरसा पहले दिल्ली आये थे तो उनसे लम्बी बातचीत हुयी, जिसमें उनकी एक फ़िल्म निर्देशक के तौर पर पहली फ़ीचर फ़िल्म - चिंटू जी, पर भी बात... Continue Reading →
सेवानिवृत्त सैनिक अधिकारी सशस्त्र बलों की गरिमा को धूमिल कर रहे हैं मैंने मूल रूप से इस लेख में टीवी सर्कस वाले ऐसे अधिकारियों के नाम लिखे थे, लेकिन पोस्ट करने से पहले मैंने उन्हें हटाने का फैसला किया -... Continue Reading →
साभार : Pratham Books Author: Rupali Bhave; Illustrator : Sunayana Nair Kanjilal; Translator: Deepa Tripathi
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