https://www.youtube.com/watch?v=TMg5khs0UnI https://www.youtube.com/watch?v=CpYuH4Cc8Mk ...[राकेश] https://cinemanthan.com/2013/11/01/namkeen1982
कवि धूमिल की अंतिम कविता – लोहे का स्वाद- एक तरह से करोड़ों शोषितों की चुप्पी को जुबान देती है। प्रियदर्शन की फिल्म कांजीवरम एक सामंजस्य स्थापित करती है उस कविता से। शब्द किस तरह कविता बनते हैं इसे देखो... Continue Reading →
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