प्रसंग सन्दर्भ - क्रांतिकारी आन्दोलन आधारित साहित्य (यशपाल) https://www.youtube.com/watch?v=bdszG4EwgdE
इस बात का बड़ा भारी शोर सुना जा रहा है कि पढ़ने वाले नौजवान(विद्यार्थी) राजनीतिक या पोलिटिकल कामों में हिस्सा न लें। पंजाब सरकार की राय बिल्कुल ही न्यारी है। विद्यार्थी से कालेज में दाखिल होने से पहले इस आशय की शर्त... Continue Reading →
श्री संपादक जी,माडर्न रिव्यू, आपने अपने सम्मानित पत्र के दिसंबर, १९२९ के अंक में एक टिप्पणी “इंकलाब जिन्दाबाद” शीर्षक से लिखी है और इस नारे को निरर्थक ठहराने की चेष्टा की है। आप सरीखे परिपक्व विचारक तथा अनुभवी और यशस्वी... Continue Reading →
प्रिय भाई, मुझे दंड सुना दिया गया है और फ़ांसी का आदेश हुआ है। इन कोठरियों में मेरे अतिरिक्त फ़ांसी की प्रतीक्षा करने वाले बहुत से अपराधी हैं। ये लोग यही प्रार्थना कर रहे हैं कि किसी तरह फ़ांसी से... Continue Reading →
सारे दिन उदास रहने के बादशाम भी अगर उदासी में गुजर जायेऔर हर पलअपनी खामोशी मेंठहर जायेतो लगता है किज़िंदगी का सबसे संवेदनशील हिस्साबगैर छटपटाए मर गया हैया फिरज़िंदगी की नस-नस मेंतेज ज़हर भर गया है। मैं नहीं जानता मेरे... Continue Reading →
पीयूष मिश्रा थियेटर संसार में स्टेज पर किस स्तर के अभिनेता हैं, थे या रहे हैं, इस बात की तस्दीक उनके नाटकों के दर्शक, उनके साथ नाटक करने वाले उनके साथी रंगकर्मी, उनके नाटकों के निर्देशक, और उनके अध्यापकगण आदि... Continue Reading →
...[राकेश] पुनश्च : हाल में ऐसी ख़बरें थीं कि सुधीर मिश्रा ने कहीं कहा है कि वे इस फ़िल्म - ये वो मंजिल तो नहीं, को दुबारा बनायेंगे| ऐसा करने से बेहतर हो कि वे इस फ़िल्म को ओटीटी आदि... Continue Reading →
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