हुसेन साहब के जलवे प्रदर्शनी का शीर्षक था - श्वेताम्बरी ! हुसेन साहब तब जॉन एलिया की नज़्म - रम्ज़ भी गुनगुना सकते थे | तुम जब आओगी तो सोया हुआ पाओगी मुझे मेरी तन्हाई में ख़्वाबों के सिवा कुछ... Continue Reading →
~ © HK Verma हिन्दी अनुवाद - ...[राकेश] [श्री एच के वर्मा के अंगरेजी में लिखे लेख का हिंदी अनुवाद] HK Verma, an alumnus of FTII, is a renowned cinematographer who, earlier in his career, collaborated with celebrated cinematographer KK Mahajan on many great films by Mani... Continue Reading →
देश के लिए यह सौभाग्य की बात है या दुर्भाग्य की, मगर यह सच है कि भारत के प्रधानमंत्री के पद का दर्जा कुछ महीनों से बहुत तेजी से उठ गया है। जो साधारण सड़कछाप वोटर इस गलतफहमी में थे... Continue Reading →
दुष्यंत पर्वतीय अंचल में घूमते-घूमते पहुँच गया| वहां जंगल में उसे सुन्दर, मासूम, और अल्हड़ता से भरपूर जीवन जीती शकुन्तला दिखाई दी| घर में पितृहीन, सौतेली माँ के कटु वचनों से आहत रहती 17-18 साल की गरीब लड़की, जिसके अन्दर... Continue Reading →
Recent Comments