Martin Brest की प्रसिद्द फ़िल्म Beverly Hills Cops (1984) से प्रेरित होकर पंकज पाराशर ने जलवा बनायी थी जिसे, खट्टा मीठा, और चश्मे बद्दूर, जैसी रोचक मध्यमार्गी फ़िल्में निर्मित करने वाले निर्माता गुल आनंद का भरपूर सहयोग मिल गया| भारत... Continue Reading →
पीयूष मिश्रा थियेटर संसार में स्टेज पर किस स्तर के अभिनेता हैं, थे या रहे हैं, इस बात की तस्दीक उनके नाटकों के दर्शक, उनके साथ नाटक करने वाले उनके साथी रंगकर्मी, उनके नाटकों के निर्देशक, और उनके अध्यापकगण आदि... Continue Reading →
एक शाम जब, अपने अन्दर जाने कितने दशकों की दास्ताँ समेटे हुये पुश्तैनी घर को छोड़कर जाना है, उस दिन की सुबह कैसी होगी, वृद्ध कलाकार हुसैन के लिए और उसके परिवार (पत्नी - सकीना, और बेटी - नूर) के... Continue Reading →
हिंदी सिनेमा में तवायफों के जीवन को हमेशा ही बहुत ग्लैमराइज़ किया गया था| श्याम बेनेगल ने हिंदी सिनेमा के उस तरीके से उलट 1983 में मंडी बनाकर प्रदर्शित कर दी और इसे देखना तवायफों का जीवन श्याम बेनेगल की... Continue Reading →
रामसे परिवार के केशु रामसे द्वारा निर्देशित खोज एक ब्रिटिश फ़िल्म पर आधारित है| मूल ब्रितानी फ़िल्म पर बहुत सी भारतीय भाषाओं में फ़िल्में बनी| रामसे ब्रदर्स फ़िल्म निर्माण फैक्ट्री की यह इकलौती फ़िल्म होगी जिसमें भूत या चुड़ैल का मुखौटा नहीं... Continue Reading →
फ़िल्म- शर्त, रिस्टोर होकर ओटीटी पर पुनः प्रदर्शित हो तो इसे आज के समय में सही दर्शक और प्रशंसक मिल जायेंगे| ...[राकेश]
...[राकेश] पुनश्च : हाल में ऐसी ख़बरें थीं कि सुधीर मिश्रा ने कहीं कहा है कि वे इस फ़िल्म - ये वो मंजिल तो नहीं, को दुबारा बनायेंगे| ऐसा करने से बेहतर हो कि वे इस फ़िल्म को ओटीटी आदि... Continue Reading →
बासु चटर्जी निर्देशित फ़िल्म - ‘खट्टा मीठा’ को एक पारिवारिक हास्य फ़िल्म के रूप में ही देखा, समझा और याद किया जाता है| पारसी किरदारों पर बनी, अच्छे संगीत और स्वस्थ हास्य से भरपूर फ़िल्म| महान अभिनेता- अशोक कुमार, जिन्हें... Continue Reading →
“दुःख तोड़ता भी है, पर जब नहीं तोड़ता या तोड़ पाता, तब व्यक्ति को मुक्त करता है” (अज्ञेय के विलक्षण उपन्यास “नदी के द्वीप” की दो में से एक नायिका का कथन) दुःख एक नितांत निजी मसला है मनुष्य के... Continue Reading →
फ़िल्म – चेहरे, का विषय रोचक है और चार मुख्य चरित्रों में वरिष्ठ अभिनेताओं को देखना सुखद है और ज्यादा से ज्यादा ऐसे विषयों पर फ़िल्में बनें तो फिल्मों के स्तर में विविधता और ज्यादा गुणवत्ता आने की संभावना... Continue Reading →
https://youtu.be/PZzK3CVzLKo?si=2nmcAZCge8fVpSNI इजाज़त में एक सच्चाई है। कविता है पर जीवन की सच्चाई से ओतप्रोत। © …[राकेश]
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