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Mahandi (1994) : एक पिता की मार्मिक कथा

80 के दशक के अंत में और 90 के दशक के शुरू में दो घटनाएं हुईं| तमिलनाडू के एक राजनेता पर पीडोफ़ाइल्‌ होने के आरोप लगे थे, उससे पहले भी एक राज्य के मुख्यमंत्री पर ऐसे आरोप लगे थे और इलस्ट्रेटेड... Continue Reading →

The Kerala Story (2024) : औचित्य!

पार्थो घोष ने 1993 में एक फ़िल्म बनाई थी -दलाल, जिसका विलेन जगन्नाथ त्रिपाठी (राज बब्बर) गर्व से कहता था कि वह चमड़ी बेचकर दमड़ी कमाता है| वह स्त्रियों को वेश्यावृत्ति में धकेलकर उनके माध्यम से पैसे कमाता था| जगन्नाथ,... Continue Reading →

Mirza Ghalib (1988-89): पूछते हैं वो कि ग़ालिब कौन है… (अध्याय 5)

“दुःख तोड़ता भी है, पर जब नहीं तोड़ता या तोड़ पाता, तब व्यक्ति को मुक्त करता है” (अज्ञेय के विलक्षण उपन्यास “नदी के द्वीप” की दो में से एक नायिका का कथन) दुःख एक नितांत निजी मसला है मनुष्य के... Continue Reading →

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