विवश श्वेत वस्त्रधारी अशरीरी अंतर्मन वापिस नरगिस के शरीर में प्रवेश कर जाता है।

लता मंगेशकर ने अपनी गायिकी से इस गीत में उपस्थित दुख भरे भावों को गहरायी प्रदान की है।

चाहे वह आवारा का ड्रीम सीक्वेंस हो या श्री 420 के इस गीत का तकनीकी पहलू हो, राज कपूर अपने फिल्मी जीवन में हिन्दी सिनेमा को बहुत सारे क्षेत्रों में दिशा प्रदान करते रहे।

तुम्हें कसम है मेरी
दिल को यूँ न तड़पाओ
ये इल्तज़ा है कि मुड़ मुड़ के देखते जाओ

हो जाने वाले मुड़ के ज़रा देखते जाना
दिल को तोड़ के तो चल दिये
मुझको न भुलाना
ज़रा देखते जाना

फरियाद कर रही है खामोश निगाहें
आँसू की तरह आँख से मुझको न गिराना
ज़रा देखते जाना

©…[राकेश]


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