








…[राकेश]
पुनश्च : हाल में ऐसी ख़बरें थीं कि सुधीर मिश्रा ने कहीं कहा है कि वे इस फ़िल्म – ये वो मंजिल तो नहीं, को दुबारा बनायेंगे| ऐसा करने से बेहतर हो कि वे इस फ़िल्म को ओटीटी आदि प्लेटफ़ॉर्मस पर प्रदर्शित करने का प्रबंध कर दें| ये तो 37 साल पहले समय के पटल पर उनके द्वारा किया गया अमिट सिनेमाई हस्ताक्षर है, अब भारतीय राजनीति से संबंधित कोई नई फ़िल्म बनाएं जिससे उनकी त्रयी (Trilogy) पूरी हो जाए|
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