जोड़ी तोर डाक शुने केऊ ना एशे तोबे एकला चोलो रे।
तोबे एकला चोलो, एकला चोलो, एकला चोलो, एकला चोलो रे।
(रविन्द्रनाथ टैगोर)

चल अकेला, चल अकेला, चल अकेला
तेरा मेला पीछे छूटा राही चल अकेला

हज़ारों मील लम्बे रास्ते तुझको बुलाते
यहाँ दुखड़े सहने के वास्ते तुझको बुलाते
है कौन सा वो इंसान यहाँ पर जिस ने दुख ना झेला
चल अकेला

तेरा कोई साथ न दे तो तू खुद से प्रीत जोड़ ले
बिछौना धरती को करके अरे आकाश ओढ़ ले
पूरा खेल अभी जीवन का तूने कहाँ है खेला

चल अकेला … (प्रदीप)

…[राकेश]


Discover more from Cine Manthan

Subscribe to get the latest posts sent to your email.