

रुक जा रात ठहर जा रे चंदा बीते न मिलन की बेला
आज चांदनी की नगरी में अरमानों का मेला
रुक जा रात …
पहले मिलन की यादें लेकर आई है ये रात सुहानी
दोहराते हैं चाँद सितारे मेरी तुम्हारी प्रेम कहानी
मेरी तुम्हारी प्रेम कहानी
रुक जा रात …
कल का डरना काल की चिंता दो तन है मन एक हमारे
जीवन सीमा के आगे भी आऊँगी मैं संग तुम्हारे
आऊँगी मैं संग तुम्हारे
रुक जा रात …
…[राकेश]
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