यह एक अविश्वसनीय सा तथ्य है कि कवि शैलेन्द्र ने 1948 में, ब्रितानी राज से स्वतंत्रता मिलने के एक साल बाद ही निम्न प्रस्तुत कविता लिख दी थी| यह आज़ाद भारत के हर दशक की कविता लगती है और आज भी प्रासंगिक लगती है| 1947 के 15 अगस्त के बाद भी उन्होंने 15 अगस्त नमक कविता लिखी थी जिसमें स्वतंत्रता पाए देश से आशाएं थीं, देश को कवि द्वारा दी गयी शुभकामनाएं थीं, देश के कल्याण के लिये मंगलकामनाएं थीं| लेकिन एक ही साल में संभवतः उनका मोह भंग हो गया और उन्होंने वह देख लिया जिसे देखने में अखबारी जगत और बुद्धिजीवी वर्ग ने दशकों लगा दिए| बहुत से तो आज तक पीछे मुड़ कर देखने के बावजूद बीते दशकों के मोह में बिंधे रहते हैं|


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