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कविराज शैलेन्द्र का पढ़ाकूपन

प्रेम कपूर ( सारिका 1966)

जनकवि दुष्यंत के अंतिम पल …

लेखक - राजेश्वरी त्यागी (धर्मपत्नी दुष्यंत कुमार) साभार : दुष्यंत के जाने पर दोस्तों की यादें (संपादक - कमलेश्वर)

साम्प्रदायिकता और सत्ता …(महादेवी वर्मा)

महादेवी वर्मा का साक्षात्कार , साक्षात्कारकर्ता - उमाकांत मालवीय Published in Sarika , November 1981

कुंदनलाल सहगल … फिल्मों में पदार्पण

राघव मेनन , Published in सारिका 1981

लालबहादुर शास्त्री… एक संस्मरण ( हेमवती नंदन बहुगुणा)

Published in Sarika, 1981

रेणु … संस्मरण (जयप्रकाश नारायण)

Published in Sarika (April 1979)

लाल कवेलुओं की छत : याद न जाए बीते दिनों की

...[राकेश]

Dillagi (1978) : होलीमय संगीत के पांच सुरीले रंग

होली केवल मनुष्यों द्वारा जन्माया गया उत्सव ही नहीं है बल्कि प्रकृति भी इस समय धरती पर रंग बिरंगे रूप में छटा बिखेरने लगती है, ऋतुओं में भी बसंत अपने पूरे यौवन पर आ जाता है| होली जीवन में लचीलेपन... Continue Reading →

लड़ाकुओं के युद्ध

विलियम ब्लेक, कहिये तो

मैंने देखा उसे…

लता मंगेशकर : स्मरण

ख़ुदा की उस के गले में अजीब क़ुदरत हैवो बोलता है तो इक रौशनी सी होती है ~ बशीर बद्र

राजेंद्र यादव को जानना और अपनाना

First Published in - हमारे युग का खलनायक राजेंद्र यादव (संपादक - भारत भारद्वाज, साधना अग्रवाल), 2003 © कृष्ण बिहारी

बात मनुज की ही कविता होगी…

© कृष्ण बिहारी

मेरी जिंदगी के दिन …

© कृष्ण बिहारी

नींद – रंजीत कपूर (नाट्य व फिल्म निर्देशक, लेखक)

प्रख्यात लेखक, नाट्य एवं फिल्म निर्देशक, व अवसरानुकूल अभिनेता श्री रंजीत कपूर की यह पहली प्रकाशित कहानी है जो अप्रैल 1969 में हिंदी की प्रसिद्द साहित्यिक पत्रिका सारिका में छपी थी| लेखक कमलेश्वर ने 1967 से तकरीबन 11 साल तक... Continue Reading →

गिरिजा कुमार माथुर : “छाया मत छूना मन” – प्रसंग

----------------------- लम्हों में ज़िन्दगी - 4 ----------------------- एम.ए. हिंदी करतें समय मुझे गुना कॉलेज के प्रो कांति कुमार जैन का मेसेज मिला की दों दिन बाद मुझे हिंदी विषय का शोध निबंध (dissertation) - "गिरिजा कुमार माथुर का काव्य शिल्प"... Continue Reading →

गिरिजा कुमार माथुर : न्यू यॉर्क की पहली यात्रा

----------------------- लम्हों में ज़िन्दगी - 2 ----------------------- अशोकनगर के रेलवे स्टेशन की बेंच पर बैठे हुए गिरिजा कुमार माथुर साहब मुझसे अपने अतीत की स्मृतियों को साझा करने लगे| उन्होंने बताया कि पचास के दशक में वह न्यू यॉर्क में... Continue Reading →

गिरिजा कुमार माथुर : यादों का सरमाया (डॉ. गोपाल किशोर सक्सेना)

किसी दार्शनिक ने कहा है -- 'यह मत देखो कि ज़िन्दगी में कितने लम्हे हैं… यह देखो कि लम्हों में कितनी ज़िन्दगी है | पचास बरस पहले मुझे माथुर साहब से मिलने का सौभाग्य निरंतर मिलता रहा. और उन से... Continue Reading →

ओशो : नेताजी सुभाषचंद्र बोस और महात्मा गांधी

मुझे एक युवक याद आते हैं| उनका नाम सुभाष चंद्र बोस था। वे एक महान क्रांतिकारी बने और मेरे मन में उनके लिए बहुत सम्मान है, क्योंकि वे भारत में एकमात्र ऐसे व्यक्ति थे जिन्होंने महात्मा गांधी का विरोध किया; वे देख सकते थे... Continue Reading →

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