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#Premkatha

अनागत : जाने गए निश्चित अंत का भय

मृत्य की दौड़ में है धरा पर हर चीज, हर भाव, जीवन में सभी कुछ अनिश्चित है निश्चित है बस एक मृत्यु | कल कल बहती नदियाँ भी सूख जायेंगीं स्थिर दिखाई देतीं चट्टानें रेत बन कर बह जायेंगीं नदियों... Continue Reading →

स्मृति : एक प्रेम की

"तुमने उस रात को आकाश के तारों तले धरती की उस सुनसान राह पर उस औरत को नहीं अपनाया था, जिससे तुम कह रहे हो तुमने प्रेम किया था"| नायिका- नंदिनी, इस प्रेम उपन्यास के अंत में नायक-सतेन, से कहती... Continue Reading →

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