समर्थ घर में जन्म न हो तो स्त्री का सौंदर्य उसके लिए सदा वरदान सिद्ध नहीं होता बल्कि बहुधा रूप उसके लिए जीवन पर ग्रहण भी लगा देता है| उम्र भर उसकी बहुत सारी ऊर्जा अपने रूप के कारण स्वयं को ज़माने की कुदृष्टि से बचाने में निकल जाती है| समर्थ परिवार में भी स्त्री अपने सौंदर्य के कारण कभी न कभी किसी बड़ी मुसीबत में पड़ती दिखाई दे ही जाती हैं|
पुरातन काल में जाएँ तो यह सीता का रूप ही था जिसका वर्णन कर शूपर्णखा ने अपने भाई महाबली रावण को सीता के प्रति इतना आसक्त कर दिया था कि वह सीता हरण के लिए आतुर हो गया अन्यथा बहन के अपमान की गाथा सुनने पर भी उसके रक्त में ऐसा उबाल नहीं आया था कि वह सीताहरण जैसा अतिरंजित कदम उठाता |
अहिल्या की सुन्दरता ने ही इंद्र को महर्षि गौतम का रूप धरकर उससे छलात्कार करवाया और महर्षि गौतम के शाप के कारण अहिल्या को शिला हो जाना पड़ा|
आम्रपाली का सौंदर्य उसे नगरवधू बना गया| पुरुष नियंत्रित समाज में स्त्री सौंदर्य इकहरी पहेली नहीं है बल्कि बहुत सी परतों की जटिल संरचना के भीतर स्त्री सौंदर्य बसता और जीता है| बुद्धि, धन, ऐश्वर्य आदि के स्वामी दूसरों में ईर्ष्या उत्पन्न करते ही हैं लेकिन रूप से ईर्ष्या एक अलग ही प्रकार की होती है और रूप पर नियंत्रण भी एक अलग ही भावना जगाती है जिसके कारण नियंत्रकों में घनघोर संघर्ष चलते आये हैं|
क्लियोपेट्रा, ट्रॉय की हेलना जैसी विदेशी स्त्रियों से लेकर भारत में रज़िया सुल्तान, रानी दुर्गावती, रानी पद्मावती, रानी रूपमती आदि के रूप के कारण इतिहास में पुरुषों ने कई युद्धों को जन्म दिया|
आधुनिक जगत के उदाहरण लिए जाएँ तो जिस मर्लिन मुनरो के सौंदर्य का सारा संसार दीवाना था उसे तीन विवाहों में भी न तो स्थायित्व मिला और न ही जीवन में शांति मिली| बहुत से कथित प्रेम प्रसंगों में उसे भटकाव ही मिले और अंततः उसकी जान चली गयी|
एक धनाढ्य परिवार में जन्मी अमृता शेरगिल एक बेहतरीन चित्रकार होने के साथ स्वयं भी एक सौंदर्य से भरपूर स्त्री थीं| उन्होंने अपने ही रूप पर मोहित होकर अपने न्यूड पोर्ट्रेट्स बनाए| उनके सौंदर्य पर मुग्ध होकर केदारनाथ अग्रवाल ने उन पर कविता लिखी| अमृता शेरगिल की ख्याति पिकासो से कम न थी और अगर वे जीवित रहतीं तो चित्रकला संसार में वे भारत की सबसे प्रसिद्द चित्रकार होतीं लेकिन अल्पायु में वे मृत्यु को प्राप्त हो गयीं| उनके चित्रकला, रूप और बुद्धि के गुणों के बावजूद उनका वैवाहिक जीवन आदर्श को तो छोड़ ही दिया जाए सामान्य रूप से शांति देने वाला भी नहीं था|
रूप के कारण प्रसिद्धि पाने वाली लीला नायडू का वैवाहिक जीवन भी ऊबड़ खाबड़ ही रहा| मीना कुमारी, सुरैया, मधुबाला, रेखा, आदि अभिनेत्रियों को उनके रूप ने अगर बहुत कुछ दिया तो इस कारण वे अपने अपने जीवन के कई महत्वपूर्ण पडावों पर अपने लिए एकदम सटीक निर्णय नहीं ले पायीं और जिस तरह के गुण उनके पास थे उनके मुताबिक़ अच्छा जीवन उनके हिस्से नहीं आया| वे बहुत ज्यादा अच्छा जीवन अपने गुणों के कारण पा सकती थीं|
पामेला सिंह अपने रूप के ही कारण अन्तर्राष्ट्रीय स्तर पर कुख्याति पाने वाली पामेला बोर्डेस बनने पर ज़माने द्वारा विवश कर दी गयीं|
वैवाहिक जीवन तो शक्तिशाली राजनेता स्त्रियों के भी शांतिपूर्ण नहीं रहे और इनमें अन्य तत्वों के अलावा उनके रूप का भी योगदान रहा ही होगा|
पुरुष नियंत्रित संसार में यह एक सरल मान्यता है कि स्त्री अपने रूप का सहारा लेकर बड़े नियंत्रण अपने हाथों में ले सकती है लेकिन यह अधूरा सत्य है क्योंकि ऐसे नियंत्रण को पाने के लिए स्त्री को किन किन पड़ावों से गुजरना पड़ सकता है उसकी चर्चा नहीं होती|
रूप के साथ बड़ा होना साधारण बात तो नहीं ही है| अन्यों की ईर्ष्या के साथ साथ यह रूपवती के अन्दर अहंकार को भी बसाए रख सकता है| कोई अन्य गुण स्त्री को इतना मानसिक विचलन नहीं दे सकता जितना रूप जनित अहंकार दे जाता है| रूप के कारण संभव यही है कि ऐसी स्त्री के पास गहरी मित्रता का साथ लगभग नहीं ही रहता| रूपवती स्त्री का साथ पाकर भी पुरुष को चैन कम ही मिलता है, उसे भय भी लगा रहता है कि ऐसी स्त्री उससे विमुख न हो जाए| अगर संबंध स्थाई हो भी तो ऐसा ही देखने में आया है कि अत्यंत गुणवान पुरुष एक रूपवती स्त्री का साथ पाकर भी अन्य स्त्रियों की ओर उन्मुख हो गए|
वरिष्ठ कथाकार कृष्ण बिहारी जी के रचनात्मक कर्म में एक वृहत स्त्री संसार मिलता है जिसके रोचक स्त्री चरित्र भारतीय साहित्य में बंगाली भाषा के साहित्य के स्त्री संसार को कड़ी प्रतियोगिता देते है| उन्होंने बहुत सी ऐसी कहानियों को जन्म दिया है जहाँ नायिका की सुन्दरता अंततः उसके लिए अभिशाप सरीखी ही सिद्ध हुयी है| स्त्री की सुन्दरता का उसके जीवन पर उसके अन्य गुणों से बहुत ज्यादा गहरा प्रभाव पड़ता है| सर्व-स्वीकृत सुन्दर स्त्री का जीवन बचपन से ही एक ऐसी राह पकड़ लेता है जहाँ शारीरिक सौंदर्य उसके जीवन को संवारने के साथ ही बहुत बड़े बिगाड़ की ओर भी ले जा सकता है| सूक्ष्म शोध-परक दृष्टि से लेखक ने विविध स्त्री चरित्रों और उनके मनोविज्ञान को अपनी कहानियों में साधा है| ऐसी कुछ कहानियों को संकलित कर उनका यह कहानी संग्रह – सुन्दर स्त्रियों का भाग्य, शिवना प्रकाशन से प्रकाशित हुआ है| संकलन स्त्री जीवन के विभिन्न पहलुओं को बारीकी से प्रस्तुत करता है|
…[राकेश]
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