होली केवल मनुष्यों द्वारा जन्माया गया उत्सव ही नहीं है बल्कि प्रकृति भी इस समय धरती पर रंग बिरंगे रूप में छटा बिखेरने लगती है, ऋतुओं में भी बसंत अपने पूरे यौवन पर आ जाता है| होली जीवन में लचीलेपन को साधने वाला उत्सव है| वृद्ध देह और मन युवावस्था को पा जाता है या पाने का प्रयास करता है, युवावस्था किशोर अल्हड़ता को पाने का प्रयास करती है और किशोर बचपन की शरारत भरी गलियों में पहुंचा जाना चाहता है, और बचपन , वह तो होली पर अपनी पूरी छटा में खिलता ही है| होली इतने आनंद से भर कर खुल कर जीने का उत्सव है जिससे अंतर्मन में दबा छिपा कोई भी भाव ग्रंथि न बन जाए और उसका वाष्पीकरण हो जाये| व्यक्ति इतना हँसे कि उसके अन्दर किसी कुंठा, किसी तरह की कलह और ऋणात्मक भावों का वास रह न जाए|
बासु चटर्जी द्वारा धर्मेन्द्र के प्रोडक्शन के लिए निर्देशित फिल्म – दिल्लगी में नायिका फूल रेणु (हेमा मालिनी) गंभीर स्वभाव की, अपने भावनाओं पर कठोर नियंत्रण करने वाली शिक्षिका है जो छात्राओं को भी कठोर अनुशासन का पालन करते देखना चाहती है| नायक स्वर्ण कमल (धर्मेन्द्र) जीवन को खुले मन से अंगीकार कर भरपूर जीने वाले जिंदादिल शिक्षक हैं| उन्हें जीवन के रस में रूचि है और जीवन से आनंद प्राप्त करते रहना उनका स्वभाव है| वे उदारमना व्यक्तित्व के स्वामी हैं, नायिका उनसे एकदम उलट स्वभाव की है| होली ने ऐसा अवसर दिया है जब धीर-गंभीर नायिका स्व:पोषित नियंत्रणों की सीमाओं से बाहर आने का प्रयास कर जीवन को सामान्य रूप से जीना आरंभ करे|
संगीतकार राजेश रोशन ने फिल्म में होली के दिखाए जाने अवसर के लिए पांच अलग -अलग तरह के संगीत की रचना की, और वे गीत, नायक, नायिका और अन्य लोगों पर होली के आगमन के प्रभाव को अभिव्यक्त करते हैं|
गीतकार – योगेश , ने होली के अवसर के पांच रंगों के लिए सटीक गीत लिखे हैं|

…[राकेश]
Discover more from Cine Manthan
Subscribe to get the latest posts sent to your email.
Leave a comment