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Cine Manthan

Cinema, Theatre, Music & Literature

Author

Cine Manthan

“Cinema is the most beautiful fraud in the world.” (Jean-Luc Godard)

Girls Will Be Girls (2024): बड़ी होती लड़की!

...[राकेश]

Meiyazhagan (2024) : भोलेपन में है वफ़ा की खुशबू

आज फिर शुरू हुआ जीवन आज मैंने एक छोटी-सी सरल-सी कविता पढ़ी आज मैंने सूरज को डूबते देर तक देखा जी भर आज मैंने शीतल जल से स्नान किया आज एक छोटी-सी बच्ची आई, किलक मेरे कन्धे चढ़ी आज मैंने... Continue Reading →

Agni (2024) : आग ये किस ने लगाई?

अपने जलने का हमेशा से तमाशाई हूँ आग ये किस ने लगाई मुझे मालूम नहीं (~ मोहम्मद आज़म) एक अग्निशामक, दमकलकर्मी, अग्नियोद्धा या फायरमैन को नायक बनाकर उनके खतरनाक कार्य को बारीकी से दिखाने के लिए फ़िल्म - अग्नि, सराहनीय... Continue Reading →

मेरे पास आओ (ये गुलिस्तां हमारा 1972)

मूलतः अभिनय के लिए जाने जाते डैनी की गायन प्रतिभा को भी सराहना मिलती रही है| फिल्म- काला सोना, में आशा भोसले संग गाया उनका गीत "सुन सुन कसम से" खासा चर्चित रहा है, इसे डैनी ने पर्दे पर खुद... Continue Reading →

आचार्य रजनीश (ओशो) की लिखी एकमात्र कहानी

~ अधूरी वासना (28 नवंबर 1953 को जबलपुर में नवभारत में यह कहानी पहली बार प्रकाशित हुई थी)

Rebellious Gulzar : Thok de Killi (Raavan)

...[Rakesh]

Kooki (2024) : कानूनी छ्लात्कार

कूकी, फ़िल्म की 16 वर्षीय नायिका (रितिषा खौंड) का नाम भी है और फ़िल्म का शीर्षक भी| गैंग रेप की शिकार नायिका के बलात्कारियों को पुलिस पकड़ लेती है, अदालत सजा भी दे देती है लेकिन कूकी को इससे राहत... Continue Reading →

Aye Zindagi (2022) : दुःख अपने पराये

दुःख ऐसा भाव है मनुष्य के जीवन में कि इसमें कुछ कहावतें एकदम सटीक बैठती हैं पर उपदेश कुशल बहुतेरे जाके पाँव न फटे बिवाई सो क्या जाने पीर पराई किसी दूसरे पर जब दुःख का साया पड़ता है तो... Continue Reading →

Sharda(1957): प्रेमिका सुहागन प्रेमी के पिता की

कल्पना कीजिये कि एक युवक की प्रेमिका परिस्थितिवश उसकी माँ बन जाये तो क्या हो? ऐसे रिश्ते से उपजे जटिल समीकरण को सुलझाने के लिए दादा साहेब फाल्के पुरस्कार से सम्मानित दक्षिण और हिन्दी फिल्मों के प्रसिद्ध निर्माता-निर्देशक एल वी... Continue Reading →

Kamli(2022) : क़ैद में है स्त्री

पाकिस्तानी फ़िल्म "कमली" तीन मुख्य स्त्री चरित्रों और कुछ अन्य स्त्री चरित्रों, और उनके इर्द गिर्द कुछ पुरुषों की मेहमान भूमिकाओं जैसी उपस्थितियों को समेटे हुए स्त्री जगत को दर्शाती है| तीनों मुख्य स्त्री चरित्र अपनी अपनी कैद में हैं|... Continue Reading →

अगम (2022): अध्यात्म की खोज वाया बनारस

संस्कृत भाषा से आये शब्द - अगम, के कई अर्थ हैं -> अनादि, अनंत, निस्सीम, अथाह, बहुत गहरा, समझ की सीमा से बाहर, जहां तक पहुँच न हो, आदि इत्यादि | हिंदी फिल्मों ने अध्यात्म पर हिन्दू दर्शन को समेटने... Continue Reading →

फिर कभी (2008)

निर्देशक वी के प्रकाश द्वारा निर्देशित फ़िल्म - फिर कभी को यूटीवी ने सीधे डीवीडी और डी टी एच पर प्रदर्शित किया था| जिन सालों में वयस्क प्रेम कहानियों पर जोगेर्स पार्क जैसी फ़िल्में बन रही थीं| यह उस दिशा से अलग किस्म की... Continue Reading →

Zid (1976) : लापता फ़िल्म

1976 में प्रदर्शित हुयी फ़िल्म - ज़िद, के अभी 50 साल भी पूरे नहीं हुए लेकिन निर्देशक विजय द्वारा निर्देशित यह फ़िल्म बहुत सालों से लापता है| चूंकि इसकी डीवीडी और शायद वीसीडी भी कभी प्रदर्शित नहीं हुयी तो वीएचएस... Continue Reading →

लता मंगेशकर एवं भगत सिंह

https://www.youtube.com/watch?v=BUK8fS1C_vM

DevAnand@101 : लता मंगेशकर गीत देव आनंद के लिए

लता मंगेशकर ने गायन में अपनी एक अधूरी रह गई इच्छा के बारे में कहा था कि वे दिलीप कुमार के लिए गीत नहीं गा पायीं और यह संभव भी नहीं था क्योंकि कई अन्य अभिनेताओं की तरह दिलीप कुमार... Continue Reading →

देव आनंद के आंसू

रोमांटिक कॉमेडी फिल्मों में देव साब को देखने की बात ही कुछ है| पचास के दशक के तीन सबसे बड़े नायकों में से एक देव आनंद अपनी फिल्मों में कोशिश करते थे कि उन्हें परदे पर रोने के सीन न करने पड़ें| शायद उन्हें... Continue Reading →

अंखियों के झरोखों से मैंने देखा जो सांवरे…

राजश्री प्रोडक्शन हाउस के अंतर्गत निर्माता ताराचंद बड़जात्या द्वारा निर्मित एवं हिरेन नाग द्वारा निर्देशित फ़िल्म, अंखियों के झरोखों से, मोटे तौर पर  Erich Segal के 1970 में प्रकाशित बहुचर्चित लघु उपन्यास Love Story, जिस पर हॉलीवुड में इसी नाम... Continue Reading →

Hip Hip Hurray (1984)

प्रकाश झा की इस फ़िल्म हिप हिप हुर्रे में गुलज़ार स्क्रीनप्ले और संवाद+गीत लेखक के रूप में जुड़े हुए हैं सो बहुत हद तक यह गुलज़ार की भी फ़िल्म है| गुलज़ार की परिचय में जीतेंद्र के चरित्र को अपने योग्य नौकरी मिलने तक के काल में अपने... Continue Reading →

अज्ञेय और उनकी सहचर स्त्रियाँ

आधुनिक हिंदी साहित्य के संभवतः सबसे बड़े लेखक स.ह.व.अज्ञेय की जीवनी अक्षय मुकुल ने अंगरेजी में लिखी है, ज्ञात नहीं कि अभी तक उसका हिंदी संस्करण प्रकाशित हुआ है या नहीं| पुस्तक में उन्होंने अज्ञेय के जीवन में समय-समय पर... Continue Reading →

तुम्हारी औक़ात क्या है : पीयूष मिश्रा

पीयूष मिश्रा थियेटर संसार में स्टेज पर किस स्तर के अभिनेता हैं, थे या रहे हैं, इस बात की तस्दीक उनके नाटकों के दर्शक, उनके साथ नाटक करने वाले उनके साथी रंगकर्मी, उनके नाटकों के निर्देशक, और उनके अध्यापकगण आदि... Continue Reading →

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