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Cine Manthan

Cinema, Theatre, Music & Literature

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अंखियों के झरोखों से मैंने देखा जो सांवरे…

राजश्री प्रोडक्शन हाउस के अंतर्गत निर्माता ताराचंद बड़जात्या द्वारा निर्मित एवं हिरेन नाग द्वारा निर्देशित फ़िल्म, अंखियों के झरोखों से, मोटे तौर पर  Erich Segal के 1970 में प्रकाशित बहुचर्चित लघु उपन्यास Love Story, जिस पर हॉलीवुड में इसी नाम... Continue Reading →

अज्ञेय और उनकी सहचर स्त्रियाँ

आधुनिक हिंदी साहित्य के संभवतः सबसे बड़े लेखक स.ह.व.अज्ञेय की जीवनी अक्षय मुकुल ने अंगरेजी में लिखी है, ज्ञात नहीं कि अभी तक उसका हिंदी संस्करण प्रकाशित हुआ है या नहीं| पुस्तक में उन्होंने अज्ञेय के जीवन में समय-समय पर... Continue Reading →

तुम्हारी औक़ात क्या है : पीयूष मिश्रा

पीयूष मिश्रा थियेटर संसार में स्टेज पर किस स्तर के अभिनेता हैं, थे या रहे हैं, इस बात की तस्दीक उनके नाटकों के दर्शक, उनके साथ नाटक करने वाले उनके साथी रंगकर्मी, उनके नाटकों के निर्देशक, और उनके अध्यापकगण आदि... Continue Reading →

फीरोजी होठ … धर्मवीर भारती

'धर्मयुग' के यशस्वी संपादक, 'गुनाहों का देवता' 'सूरज का सातवाँ घोडा' और 'अंधायुग' आदि अति प्रसिद्ध पुस्तकों के रचियता डॉ धर्मवीर भारती की लंबी कवितायें खूब सराही जाती रही हैं| एक बेहद गंभीर छवि के स्वामी डॉ भारती की श्रंगार... Continue Reading →

Angry Young Men The Salim Javed Story

सलीम-जावेद द्वारा लिखी गई फिल्मों की सफलता की पतंग आसमान में ऊपर, और ऊपर चढ़ती ही जा रही थी कि पहले ईमान धरम और फिर शान ने उस उड़ान को नीचे गोता लगवा दिया| बीच बीच में डॉन जैसी सुपर... Continue Reading →

Gulzar@90

शेरदिल: द पीलीभीत सागा और प्रकृति प्रेमी गुलज़ार : गुलज़ार घोषित रूप से 90 साल के हो गए हैं| आज भी वे अवसर मिलते ही पूरे संवदेना से हिंदी फ़िल्मी गीतों की सीमाओं का अतिक्रमण करते हुए भी वर्तमान में... Continue Reading →

गुरु दत्त, ओशो और जीने की इच्छा!

कहा जाता है कि अभिनेता-निर्देशक गुरुदत ने आत्महत्या की थी, और इस बात को मानने वाले इस बात को स्वीकार नहीं करते कि शराब और नींद की गोलियों के मिश्रण से यह एक दुर्घटना मात्र भी हो सकती थी पर तब भी... Continue Reading →

Routu Ka Raaz (2024)

उत्तराखंड में मसूरी के पास स्थित एक छोटी सी जगह के एस एच ओ - दीपक नेगी (नवाज़ुद्दीन सिद्दीकी) मंथर गति से चलायमान इस फ़िल्म के नायक हैं| फ़िल्म में दीपक नेगी का भूतकाल है जिसने उसके वर्तमान को ग्रसित... Continue Reading →

The Miniaturist Of Junagadh (2021)

एक शाम जब, अपने अन्दर जाने कितने दशकों की दास्ताँ समेटे हुये पुश्तैनी घर को छोड़कर जाना है, उस दिन की सुबह कैसी होगी, वृद्ध कलाकार हुसैन के लिए और उसके परिवार (पत्नी - सकीना, और बेटी - नूर) के... Continue Reading →

Tarla (2023)

पीयूष गुप्ता द्वारा निर्देशित फ़िल्म - तरला, जो कला की, विशेषज्ञ , कलाकार एवं वैज्ञानिक तरला दलाल की बायोपिक है और "स्त्री विमर्श" को आधुनिक काल में केंद्र में रखती है| भारत में स्त्री विमर्श और स्त्री प्रगति पर बनी एक सबसे महत्वपूर्ण फ़िल्म... Continue Reading →

Meryl Streep & John Cazale

2016 में  New York Post में Maureen Callahan द्वारा लिखे अंगरेजी के लेख पर आधारित

Gandhi & Film

रिचर्ड एटनबरो की गांधी और बासु भट्टाचार्य एवं राजकुमार संतोषी ---------------------------------------------------------------------- 50 और 60 के दशक में हिंदी सिनेमा में एक से बढ़कर एक दिग्गज फ़िल्म निर्देशक और हर लिहाज से समर्थ निर्माता उपस्थित थे, बड़े काबिल लेखक फिल्मों के... Continue Reading →

RimJhim ke Tarane leke

एक अकेली छतरी में जब आधे आधे भीग रहे थे, पंक्ति जब गुलज़ार ने रची होगी अपनी फ़िल्म इज़ाजत के एक गीत के लिए, तब बहत संभावना है इस बात की कि उनकी स्मृति में विजय आनंद की फ़िल्म काला बाज़ार... Continue Reading →

Mandi (1983)

हिंदी सिनेमा में तवायफों के जीवन को हमेशा ही बहुत ग्लैमराइज़ किया गया था| श्याम बेनेगल ने हिंदी सिनेमा के उस तरीके से उलट 1983 में मंडी बनाकर प्रदर्शित कर दी और इसे देखना तवायफों का जीवन श्याम बेनेगल की... Continue Reading →

Panic Room (2002)

David Fincher  की फ़िल्म - Panic Room, दर्ऊशक को लगातार तनाव में रखने वाला थ्रिलर है, जो एक स्त्री चरित्र के साहस, मुसीबत में भी धैर्य बनाए रखकर उसकी त्वरित निर्णय लेने की क्षमता और एक दृढ निश्चय कि वह अपनी... Continue Reading →

Gone Girl (2014)

David Fincher की यह फ़िल्म एक साइकोलॉजिकल थ्रिलर के रूप में फ़िल्म शानदार है| फ़िल्म निर्माण के दौरान अभिनेतागण निर्देशक के हाथ की कठपुतलियां होते हैं तो यह फ़िल्म दर्शाती है कि फ़िल्म बनकर प्रदर्शित होने के बाद, एक बहुत अच्छी... Continue Reading →

The Killer (2023)

The Killer को David Fincher द्वारा Organized Crime के संसार पर प्रस्तुत एक श्वेत पत्र माना जा सकता है| एक तो फ़िल्म अपराध के इस संसार को एक सफल कॉर्पोरेट की तरह संगठित एवं संयोजित रूप से कार्यान्वित दिखाती है,... Continue Reading →

चाय के बहाने (चिंटूजी 2009)

अंतरे जैसे मुखड़े से शुरू होकर गीत में तीन अंतरे और हों तो यह तो स्पष्ट ही है कि 2009 में प्रदर्शित फ़िल्म - चिंटूजी में इस गीत का अस्तित्व ऐसे ही समय काटने के लिए नहीं है, बल्कि गीत... Continue Reading →

36 Ghante (1974)

थ्रिलर फ़िल्म की सफलता इस बात में है कि परदे पर घटित हर बीतते पल दर्शक को असमंजस में डाले रखे कि आगे क्या होगा या अगर दर्शक कुछ चाह रहा है किन्हीं चरित्रों की तरफ से तो वैसा घटित... Continue Reading →

Khoj (1989)

रामसे परिवार के केशु रामसे द्वारा निर्देशित खोज एक ब्रिटिश फ़िल्म पर आधारित है| मूल ब्रितानी फ़िल्म पर बहुत सी भारतीय भाषाओं में फ़िल्में बनी| रामसे ब्रदर्स फ़िल्म निर्माण फैक्ट्री की यह इकलौती फ़िल्म होगी जिसमें भूत या चुड़ैल का मुखौटा नहीं... Continue Reading →

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