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#Jagjitsingh

Gulzar@91 : सबने देखी है शब्दों से फैलती खुशबू

बंदिनी में सचिन देव बर्मन के साथ एक बेहद खूबसूरत गीत (मोरा गोरा अंग लई ले, मोहे श्याम रंग दई दे) से फ़िल्मी गीत लिखने की शुरुआत करने वाले गुलज़ार पिछले 62 वर्षों से निरंतर संगीत निर्देशकों और फ़िल्म निर्देशकों... Continue Reading →

निष्फल कुछ नहीं – (टैगोर)

भारत के गौरव गुरुदेव रबिन्द्रनाथ टैगोर, एक मानवतावादी, प्रकृतिविद, कवि, चित्रकार, संगीतकार, लेखक, शिक्षाविद, और भारतीय संस्कृति एवम कला के ध्वजवाहक रहे हैं, वे देशों की सीमाओं को पार कर गये हैं और पिछले सौ सालों से भी ज्यादा समय से... Continue Reading →

पंकज उधास और संजय दत्त के फ़िल्मी जीवन के मोड़

....[राकेश]

जाग के काटी (Leela 2002) : विनोद खन्ना, जगजीत सिंह, और गुलज़ार, की महफ़िल का रतजगा

रिश्तों में गर्माहट का स्थान ठंडक और परस्पर दूरियां ले लें तो इसके लिए उपमा देने के लिए नई सदी में तो गुलज़ार ही श्रेष्ठ विकल्प हो सकते हैं| गुलज़ार के सृजन आवश्यक नहीं कि काल खंड पर सिलसिलेवार ही... Continue Reading →

Mirza Ghalib (1988-89): पूछते हैं वो कि ग़ालिब कौन है… (अध्याय 5)

“दुःख तोड़ता भी है, पर जब नहीं तोड़ता या तोड़ पाता, तब व्यक्ति को मुक्त करता है” (अज्ञेय के विलक्षण उपन्यास “नदी के द्वीप” की दो में से एक नायिका का कथन) दुःख एक नितांत निजी मसला है मनुष्य के... Continue Reading →

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