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#Sapna

पंडित और डम्बलडोर

अवगाह लिए सब ग्रंथ कंठस्थ हो गईं ऋचाएं भौतिकी से अध्यात्म तक ज्यामिती से इतिहास तक अब तक मानव ने पाया था जो ज्ञान! मस्तिष्क के तंतुओं का जाल शरीर के ऊतकों का स्थान पाकर यह सब ज्ञान दिख पड़ता... Continue Reading →

हँसती रहो मुँह छिपाकर

तुमने कभी देखा ओस की बूंद को फूल पे? एक छोटी सी बूँद … बहुत नाज़ुक लेकिन कितनी जीवंत! सारे रंग अपने में समेटे, फूल के आगोश में लिपटी ‘बूँद’ रात भर सपना देखती है… सुबह का, सुबह के ताजगी... Continue Reading →

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