अवगाह लिए सब ग्रंथ कंठस्थ हो गईं ऋचाएं भौतिकी से अध्यात्म तक ज्यामिती से इतिहास तक अब तक मानव ने पाया था जो ज्ञान! मस्तिष्क के तंतुओं का जाल शरीर के ऊतकों का स्थान पाकर यह सब ज्ञान दिख पड़ता... Continue Reading →
तुमने कभी देखा ओस की बूंद को फूल पे? एक छोटी सी बूँद … बहुत नाज़ुक लेकिन कितनी जीवंत! सारे रंग अपने में समेटे, फूल के आगोश में लिपटी ‘बूँद’ रात भर सपना देखती है… सुबह का, सुबह के ताजगी... Continue Reading →
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