विस्मृतियों की छांह न होती तो जीना दूभर हो जाता कौन किसे जीता है हरदम याद भी होती जाती कम-कम जीवन पल-पल बदला करता स्थायी कब रहा है मौसम भूलना मुश्किल होता तो मरना भी दुष्कर हो जाता विस्मृतियों की... Continue Reading →
सही मार्ग पर चलने वाले, ईमानदारी से जीवन व्यतीत करने वाले, अच्छे गुणों के आधार पर अन्य लोगों को पसंद और बुरे गुणों के आधार पर नापसंद करने वाले, और एक व्यक्ति किस तरह का व्यवहार अन्यों से करता है,... Continue Reading →
निर्देशक Quentin Tarantino की फ़िल्म Kill Bill के दोनों भाग, एक के तुरंत बाद दूसरा, देखने के लिए दर्शक के पास अगर लगभग 4 घंटे और 10 मिनट न हों, तो इसे तभी देखने का प्रयास करना चाहिए जब इतना... Continue Reading →
भारत के सन्दर्भ में बरसात, उसमें भी ग्रामीण भारत के सन्दर्भ में बरसात के गीतों में भारत और रूस (सोवियत संघ) के संयुक्त उपक्रम से सन 1957 में बनी फ़िल्म - परदेसी, जिसका भारतीय संस्करण ख्वाजा अहमद अब्बास ने लिखा... Continue Reading →
परदे पर जिसे किशोरावस्था से युवा होने के काल के बीच का नायक कहा जा सके वे ऋषि कपूर पहले ही थे हिंदी सिनेमा में| उनसे पहले के जितने भी अभिनेताओं ने नायक के रूप में अपनी पारी शुरू की वे... Continue Reading →
मानव जाति का इतिहास गवाह है कि अच्छाई और बुराई एक साथ नहीं रह सकते, स्वतंत्रता और साम्राज्यवाद एक साथ नहीं रह सकते, अच्छी और बुराइयों से ग्रस्त सभ्यताओं में टकराव अवश्यंभावी है, इसे न कभी कोई टाल सका है... Continue Reading →
Hollywood की बगिया में मूलतः एक्शन स्टार Sylvester Stallone को एक कायदे का अभिनेता होने का सम्मान दिलवाने वाली फिल्मों की दो सीरीज में से एक है 5 फिल्मों वाली Rambo सीरीज, इसमें भी पहली फ़िल्म First Blood का एक अलग ही महत्त्व है| युद्ध सैनिक और... Continue Reading →
बहुत प्यार पाया बहुत प्यार खोया बहुत मुस्कराया बहुत बार रोया मगर ज़िंदगी से शिकायत नहीं की। जिसे चाहता था वही खो गया किसी और का वो कहीं हो गया मगर एक बिरवा मुझे दे गया आकाश पीड़ा का... Continue Reading →
इससे पहले कि, भूखे–नंगे, आसमान से बगावत कर बैठते, उलट जाते मठाधीशों के सिंहासन, जिल्लेसुभानी बनने वालों के ताज नोंच दिए जाते, इससे पहले कि बराबरी का हक मांगने के लिए लहू पसीने की अंतिम क्रांति उठ खड़ी होती, पोथियों–उपदेशों-बाजों... Continue Reading →
तुमने कभी देखा ओस की बूंद को फूल पे? एक छोटी सी बूँद … बहुत नाज़ुक लेकिन कितनी जीवंत! सारे रंग अपने में समेटे, फूल के आगोश में लिपटी ‘बूँद’ रात भर सपना देखती है… सुबह का, सुबह के ताजगी... Continue Reading →
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