Search

Cine Manthan

Cinema, Theatre, Music & Literature

Tag

#WaheedaRehman

और क्या अहद-ए-वफ़ा होते हैं (सनी 1984) : धर्मेन्द्र फैक्टर

और क्या अहद-ए-वफ़ा होते हैंलोग मिलते हैं, जुदा होते हैं कब बिछड़ जाए, हमसफ़र ही तो हैकब बदल जाए, एक नज़र ही तो हैजान-ओ-दिल जिसपे फ़िदा होते हैं और क्या अहद-ए-वफ़ा होते हैं जब रुला लेते हैं जी भर के... Continue Reading →

धर्मेन्द्र : परदे पर स्त्री तिरस्कार का सामना

...[राकेश]

तुम्हारा इंतज़ार है तुम पुकार लो : Khamoshi(1969)

...[राकेश]

शैलेन्द्र : गीतकार की अमीरी-गरीबी, तीसरी कसम और मृत्यु

मजरुह सुल्तानपुरी को 1994 में दादा साहेब फालके पुरस्कार दिया गया तो उनकी आयु उस वक्त तकरीबन 75 साल की थी और फिल्मों में गीत लिखते हुए उन्हें लगभग 50 साल हो चुके थे| इस अवसर पर दूरदर्शन को साक्षात्कार... Continue Reading →

Rehana Sultan : सिनेमा से पहले, परदे के पीछे

~ © HK Verma हिन्दी अनुवाद - ...[राकेश] [श्री एच के वर्मा के अंगरेजी में लिखे लेख का हिंदी अनुवाद] HK Verma, an alumnus of FTII, is a renowned cinematographer who, earlier in his career, collaborated with celebrated cinematographer KK Mahajan on many great films by Mani... Continue Reading →

Shailendra A Love Lyric in Print : A Daughter Remembers

असमय मात्र 43 साल की आयु में मृत्यु हो जाने से या उनके द्वारा रचे गए उच्च गुणवत्ता के गीतों की उपस्थिति से, कारण जो भी रहा हो, गीतकार शैलेन्द्र को हिंदी फिल्मों के संगीत के रसिक लोग फ़िल्म बरसात... Continue Reading →

Sunny (1984): राज खोसला की ढलकती निर्देशकीय प्रतिभा का नमूना

राज खोसला निर्देशित भावनाओं के धरातल पर रचाई फ़िल्म में दो तत्व ही विशेष महत्त्व के हैं| राहुल देव बर्मन द्वारा संगीतबद्ध दो गीत| एक गीत, और क्या अहदे वफ़ा होते हैं, को आशा भोसले और सुरेश वाडकर ने अलग... Continue Reading →

Guide(1965) : कुछ गीत और विजय आनंद (1)

कवि शैलेन्द्र सा महान गीतकार हो, सचिन देव बर्मन जैसा महान संगीतकार, जिसके गीतों की मिठास की प्रतियोगिता में उँगलियों पर गिने जा सकने वाले संगीतकार ही रहे हैं, साथ हो, लता मंगेशकर, मोहम्मद रफ़ी, जैसे महानतम गायक और एक एक गीत से फ़िल्म के संगीत... Continue Reading →

RimJhim ke Tarane leke

एक अकेली छतरी में जब आधे आधे भीग रहे थे, पंक्ति जब गुलज़ार ने रची होगी अपनी फ़िल्म इज़ाजत के एक गीत के लिए, तब बहत संभावना है इस बात की कि उनकी स्मृति में विजय आनंद की फ़िल्म काला बाज़ार... Continue Reading →

यश चोपड़ा की फ़िल्मी शरारतें

...[राकेश]

Animal(2023) : Alpha Male & Swanand Kirkire

हिंदी फिल्मों में ही ऐसे उदाहरण मिल जायेंगे जहां किसी चरित्र का चित्रण समाज के लिए घातक लगेगा लेकिन फ़िल्में आती हैं चली जाती हैं, समाज अपनी मंथर गति से बदलाव देख,समझ, स्वीकार करके बढ़ता रहता है| आखिरकार तो सिनेमा... Continue Reading →

Blog at WordPress.com.

Up ↑