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Cine Manthan

Cinema, Theatre, Music & Literature

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Cine Manthan

“Cinema is the most beautiful fraud in the world.” (Jean-Luc Godard)

Ghoomer (2023) :  अभिषेक को अमिताभ बच्चन के अभिनय के साये से बाहर निकलना ही होगा

                      ...[राकेश]

रोते रोते गुज़र गई रात रे [Buzdil (1951)]…

चेतावनी : कमजोर ह्रदय के श्रोता, विशेषकर प्रेम में वियोग झेल रहे व्यक्ति, और ऐसे व्यक्ति जिन्होंने कभी भी जीवन में सच में प्रेम को जीवन में जिया हो, इस गीत को रात की तन्हाइयों में लगातार न सुनें| उर्दू... Continue Reading →

डंकी ड्रीम!

बात बहुत पुरानी नहीं है। वक्त केथोड़े ही वक्फे भूत हुए होंगे जब डंकी लोग, अर्थात गर्दभ/गधे इस बार मनुष्य के साथ आर पार की लड़ाई करने के मूड में आ गये और सारे गधों को गाँव के बाहर एक... Continue Reading →

जॉन एलिया : सिनेमा के परदे पर कब?

[ सालहा साल और एक लम्हाकोई भी तो ना इनमे बल आया खुद ही एक दर पर मैंने दस्तक दीखुद ही लड़का सा मैं निकल आया उर्दू शायरी के गुलशन में हज़ारों फूलों ने अहसास की अमिट खुशबू बिखेरी है... Continue Reading →

दूर कोई गाये (बैजू बावरा 1952) : राधा बिन गूंगी कृष्ण की मुरलिया

दूर कोई गाए धुन ये सुनाए तेरे बिन छलिया रे बाजे न मुरलिया मन के अंदर हो प्यार की अग्नि नैना खोये-खोये के हाय रामा नैन खोये-खोये अभी से है ये हाल तो आगे राम जाने क्या होए नींद नहीं... Continue Reading →

जय वीरू ढ़ाबा, रामगढ़

...[राकेश]

कृष्ण लीला (1)

राधिका : सुनंदा मौसी, प्लीज अपनी शादी से पहले मेरे कॉलेज में कृष्ण नाटक करवा दो न| मैंने अपनी ड्रामा टीचर से कह दिया है कि वार्षिक उत्सव के लिए नाटक मैंने तैयार कर लिया है और बस अब अभ्यास... Continue Reading →

मुस्लिम-मुस्लिम भाई-भाई

छूत की बीमारियाँ यों कई हैं; पर डर-जैसी कोई नहीं। इसलिए और भी अधिक, कि यह स्वयं कोई ऐसी बीमारी है भी नहीं-डर किसने नहीं जाना? – और मारती है तो स्वयं नहीं, दूसरी बीमारियों के ज़रिये। कह लीजिए कि... Continue Reading →

दिलीप कुमार : परिवार नियोजन

वर्तमान के अभिनेताओं से उलट, जो राजनीतिक रूप से उदासीन रहते हैं, अभिनेता दिलीप कुमार राजनीति में बेहद सक्रिय रहे| उन्होंने कांग्रेस के लिए बहुत से चुनावों में मोर्चा संभाल कर प्रचार किया| वे अपनी सामाजिक एवं राजनीतिक जिम्मेदारियों से... Continue Reading →

जाग के काटी (Leela 2002) : विनोद खन्ना, जगजीत सिंह, और गुलज़ार, की महफ़िल का रतजगा

रिश्तों में गर्माहट का स्थान ठंडक और परस्पर दूरियां ले लें तो इसके लिए उपमा देने के लिए नई सदी में तो गुलज़ार ही श्रेष्ठ विकल्प हो सकते हैं| गुलज़ार के सृजन आवश्यक नहीं कि काल खंड पर सिलसिलेवार ही... Continue Reading →

Baran (2001): प्रेम की दास्तान !

  ...[राकेश]

देव आनंद : अमर प्रेमी !

                         ...[राकेश]

देव आनंद : दिल की उमंगें हैं जवां

....[राकेश]

टोटका (4) … (रहस्यमयी पत्र)

सेठ दामोदर के घर पर! जवाहर – मैडम, आपको सेठ जी के सभी लाकर्स आदि खुलवाने पड़ेंगे| सेठ जी के कमरे में एक तिजोरी दिखाई दी थी उसकी चाभी है आपके पास? सुनीता- बैंकों आदि में लाकर्स की जानकारी मुझे... Continue Reading →

टोटका (3) (पोस्टमार्टम)

अगले दिन सुभाष थाने में जवाहर के कक्ष में पहुँचता है| सुभाष – सर, पोस्ट मार्टम रिपोर्ट आ गयी है, एंटीमार्टम रिपोर्ट तो जीरो है| रिपोर्ट अभी तो यही बता ही रही है कि मौत दिल के बड़े भारी दौरे... Continue Reading →

टोटका (2)… (हत्या : प्राथमिक जांच)

सुभाष, डॉक्टर गौतम और कमला को लेकर थाने पहुँचता है और जवाहर को सूचित करता है| जवाहर : ऐसा करो पहले डॉक्टर गौतम को अन्दर बुलाओ, पहले उनसे ही बात कर लेते हैं| सुभाष और डॉक्टर गौतम जवाहर के कक्ष... Continue Reading →

टोटका (1) … (हत्या)

सीनियर इन्स्पेक्टर सुभाष ने एस पी जवाहर चौधरी से कहा,” सर, आज तो आपका सेवा में आख़िरी दिन है| आपको याद है, वो टोटके वाला केस? मैंने जब भी पूछा आपने टाल दिया पर मुझे हमेशा से लगता रहा है... Continue Reading →

स्मृति : एक प्रेम की

"तुमने उस रात को आकाश के तारों तले धरती की उस सुनसान राह पर उस औरत को नहीं अपनाया था, जिससे तुम कह रहे हो तुमने प्रेम किया था"| नायिका- नंदिनी, इस प्रेम उपन्यास के अंत में नायक-सतेन, से कहती... Continue Reading →

Majboor (1974) : मजबूर ये हालात इधर भी हैं उधर भी

...[राकेश]

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