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#Anubhav1972

Gulzar@91 : सबने देखी है शब्दों से फैलती खुशबू

बंदिनी में सचिन देव बर्मन के साथ एक बेहद खूबसूरत गीत (मोरा गोरा अंग लई ले, मोहे श्याम रंग दई दे) से फ़िल्मी गीत लिखने की शुरुआत करने वाले गुलज़ार पिछले 62 वर्षों से निरंतर संगीत निर्देशकों और फ़िल्म निर्देशकों... Continue Reading →

मुझे जां न कहो : (अनुभव 1972)

मेरी जां, मुझे जां न कहो मेरी जाँ बरसात की एक रात का गीत है| बरसात के मौसम में अलग अलग सुबह, दिन, शाम और रात की बरसात, बरसात से सम्बंधित किसी न किसी फ़िल्मी गीत की याद दिलाती ही है|... Continue Reading →

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