यह गीत हृषिकेष मुखर्जी की फिल्म फिर कब मिलोगी (1974) का है। इसे लिखा था मजरूह सुल्तानपुरी ने और संगीतबद्ध किया था आर.डी.बर्मन/पंचम ने। फिल्म में यह यह गीत दो बार आता है। पहली बार यह एकल गीत के रुप... Continue Reading →
दुनिया भर में बहुत सारा वैज्ञानिक, तकनीकी एवम औद्योगिक विकास सैन्य क्षमता बढ़ाने के लिये हुआ है और सह-उत्पाद के रुप में आम जनता के काम आने वाली तकनीक और उत्पाद विकसित हो गये हैं। सैन्य शक्त्ति और वैज्ञानिक तकनीकी... Continue Reading →
“I do not want my house to be walled in on all sides and my windows to be stuffed. I want the cultures of all the lands to be blown about my house as freely as possible. But I refuse... Continue Reading →
गीत के नीचे दिये ऑडियो में एक अंतरा ज्यादा है। https://youtu.be/94xePOCF6yU?si=ztT1oXE_JC-J_gBd ...[राकेश]
अदब आमोज़ है मयखाने का जर्रा-जर्रा सैंकड़ों तरह से आ जाता है सिजदा करना इश्क पाबंदे वफा है न कि पाबंदे रसूम सर झुकाने को नहीं कहते हैं सिजदा करना। बड़ा फर्क है सम्प्रदाय, जिसे लोग गलती से धर्म भी... Continue Reading →
पंकज मलिक, उमा शशि और के.एल. सहगल संस्करण के.सी.डे, उमा शशि और के.एल.सहगल संस्करण https://youtu.be/gFQlI7QjbOI?si=hgDfPxx-nwJ78kR7 ...[राकॆश]
https://youtu.be/PZzK3CVzLKo?si=2nmcAZCge8fVpSNI इजाज़त में एक सच्चाई है। कविता है पर जीवन की सच्चाई से ओतप्रोत। © …[राकेश]
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