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गिरिजा कुमार माथुर : निराला प्रसंग

---------------------- लम्हों में ज़िन्दगी - 6 ----------------------- सेवानिवृत्ति के बाद माथुर साहब अधिक समय तक अशोकनगर आते रहे. एक बार बसंत पंचमी के दिन वह वही थे. उन्हें स्मरण हुआ कि बसंत पंचमी के दिन तो महाप्राण निराला का जन्मदिन... Continue Reading →

गिरिजा कुमार माथुर : “छाया मत छूना मन” – प्रसंग

----------------------- लम्हों में ज़िन्दगी - 4 ----------------------- एम.ए. हिंदी करतें समय मुझे गुना कॉलेज के प्रो कांति कुमार जैन का मेसेज मिला की दों दिन बाद मुझे हिंदी विषय का शोध निबंध (dissertation) - "गिरिजा कुमार माथुर का काव्य शिल्प"... Continue Reading →

गिरिजा कुमार माथुर : न्यू यॉर्क की पहली यात्रा

----------------------- लम्हों में ज़िन्दगी - 2 ----------------------- अशोकनगर के रेलवे स्टेशन की बेंच पर बैठे हुए गिरिजा कुमार माथुर साहब मुझसे अपने अतीत की स्मृतियों को साझा करने लगे| उन्होंने बताया कि पचास के दशक में वह न्यू यॉर्क में... Continue Reading →

गिरिजा कुमार माथुर : यादों का सरमाया (डॉ. गोपाल किशोर सक्सेना)

किसी दार्शनिक ने कहा है -- 'यह मत देखो कि ज़िन्दगी में कितने लम्हे हैं… यह देखो कि लम्हों में कितनी ज़िन्दगी है | पचास बरस पहले मुझे माथुर साहब से मिलने का सौभाग्य निरंतर मिलता रहा. और उन से... Continue Reading →

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