Search

Cine Manthan

Cinema, Theatre, Music & Literature

Tag

Pakistan

वतन पर खतरे के समय फ़िल्म उद्योग के कर्त्तव्य

सन 1962 में भारत के प्रथम प्रधानमंत्री पंडित नेहरु की वैश्विक शांति में आस्था पर चोट करते हुए उनके पंचशील के सिद्धांत को ठुकराते हुए पड़ोसी चीन ने भारत पर आक्रमण कर दिया| अंगरेजी हुकूमत से आज़ादी मिले डेढ़ दशक... Continue Reading →

1971 (2007)

बांग्लादेश मुक्ति संघर्ष के कारण छिड़े भारत-पाक युद्ध (1971) के दौरान भारतीय सेना ने न केवल रिकॉर्ड समय में इस युद्ध को जीता बल्कि दुनिया के किसी भी अन्य देश से ज्यादा बड़ा कारनामा दिखाते हुए पाकिस्तान की सेना से आत्मसमर्पण करवा कर लगभग 90000 युद्धबंदियों... Continue Reading →

Shershah (2021) : कैप्टेन विक्रम बत्रा (पीवीसी) की शहादत

कारगिल का युद्ध एक ऐसा कड़वा इतिहास है जो भारतीय जनमानस से आसानी से हट नहीं पायेगा| जिसने भी उस दौर का मंजर देखा है, उसे कश्मीर की तरफ कूच करती बोफोर्स तोपें और सेना की टुकडियों के वाहनों की... Continue Reading →

Dilip Kumar उर्फ़ मोहम्मद युसूफ खान और “भारत रत्न”

क्या दिलीप कुमार और भारत रत्न के बीच कुछ फासले हैं? यह तो सर्वत्र स्वीकृत बात है कि हिन्दी सिनेमा में नायक की भूमिकाएं निभाने वाले अभिनेताओं में वे चुनींदा सर्वश्रेष्ठ अभिनेताओं में से एक रहे हैं बल्कि हिन्दी सिने... Continue Reading →

Shikara (2020) : कैंसर चिकित्सा पर श्वेत पत्र के बदले हीलिंग टच थेरेपी पर लघु पत्र

विनोद चोपड़ा ने जब 1942 A Love Story बनाई थी और अखबारों में उनका एक बयान छपा था जिसके अनुसार उन्होंने दावा किया था,"I am the best filmmaker in India" तब किसी पत्रकार द्वारा फ़िल्म के बारे में पूछने पर... Continue Reading →

Mammo (1994) : भारत के बंटवारे और ‘दो राष्ट्र’ के जिद्दी प्रयोग में दबी कुचली ज़िंदगी

...[राकेश]

Jai Ho! Democracy : भारत-पाक तनाव की निरर्थकता को उकेरती एक एंटी वार फिल्म

भारत- पाकिस्तान के बीच तनाव का आलम ऐसा है कि बिना आग भी धुआँ उठ सकता है और बिना मुददे के भी दोनों देश लड़ सकते हैं, इनकी सेनाएं जंगे-मैदान में दो –दो हाथ न करें तो क्रिकेट के मैदान... Continue Reading →

Partition (2007) : भारत के हिंसक विभाजन में जन्मी प्रेमकथा

भारतीय दर्शकों को खटक सकता है नसीम की भूमिका को विदेशी अभिनेत्री Kristin Kreuk से करवाया जाना। शुरु में उन्हे एक मुस्लिम महिला के रुप में स्वीकार करने में कठिनाई भी होती है पर यह एक हॉलीवुड प्रोडक्शन है और... Continue Reading →

Dharm(2007) : दिल न मंदिर, न मस्जिद, न गिरजा, न गुरुद्वारा

ये कंकर पत्थर की दुनिया जज्बात की कीमत क्या जाने दिल मंदिर भी है दिल मस्जिद भी है ये बात सियासत क्या जाने। © ...[राकेश]

Blog at WordPress.com.

Up ↑