सन 1984 के किसी दिवस की बात है| एक शिष्य अपने गुरु दवारा बसाए गये शहर में उनके आवास के बाहर रोते हुए गुरु की निजी सचिव से कह रहा है,” भगवान, ने मुझे किस मुसीबत में डाल दिया| मुझे... Continue Reading →
ऑस्कर विजेता फिल्म क्रैश रेसिज्म का दंश झेलते अमेरिकी समाज में, जहाँ पात्र गोरे, काले और प्रवासियों के खानों में बँटे हुये हैं, पनप रही कहानियाँ दिखाती है। अपने तनावग्रस्त जीवन में सारे चरित्र कहीं न कहीं किसी न किसी... Continue Reading →
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