योगेन्द्र यादव के मूल रूप से अंगरेजी में लिखे लेख का हिंदी अनुवाद प्रस्तुत है :- अगर हम आज सकारात्मक राष्ट्रवाद को पुनः प्राप्त करने के लिए कदम बढायें तो बहुतों की निगाह निर्मल वर्मा की वैचारिकी की ओर बिल्कुल... Continue Reading →
समाजवाद और साम्यवाद : वही फर्क करता हूं मैं जो टी.बी. की पहली स्टेज में और तीसरी स्टेज में होता है, और कोई फर्क नहीं करता हूं। समाजवाद थोड़ा सा फीका साम्यवाद है, वह पहली स्टेज है बीमारी की। और पहली स्टेज पर बीमारी... Continue Reading →
Recent Comments