लगभग सभी समाज सेवी संगठनों (एनजीओ) का कुछ साल पहले तक एक आम शगल हुआ करता था (बहुतों का अभी भी है और आगे भी होता रहेगा), कि जब वे मैदान में समाज सेवा करने उतरती थीं तो वे जमीन... Continue Reading →
सन 1984 के किसी दिवस की बात है| एक शिष्य अपने गुरु दवारा बसाए गये शहर में उनके आवास के बाहर रोते हुए गुरु की निजी सचिव से कह रहा है,” भगवान, ने मुझे किस मुसीबत में डाल दिया| मुझे... Continue Reading →
चाहे हिमालय के भव्य अस्तित्व का श्रंगार करती हुयी सूरज की किरणें हों या एल्प्स की वादियों की गोद को धीमी नाजुक आँच से मदमाती हुयी सूरज की किरणें हों, सुबह के सूरज की लालिमा के सौंदर्य का कहीं कोई... Continue Reading →
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