एक फाइट मास्टर के तौर पर उन्होने कितनी ही फिल्मों में एक से बढ़ कर हैरत अंगेज लड़ाई के दृष्यों की रचना की और दर्शकों को रोमांचित किया।

भले ही कई फिल्मों में वे एक ही दृश्य में नज़र आए हों पर जिसने एक बार भी उनके दर्शन सिनेमा के परदे पर कर लिए उसके लिए उन्हें भूल पाना कठिन है|

अब जब उनके पुत्र रोहित शेट्टी एक बड़े और सफल निर्देशक बन चुके हैं, अगर शेट्टी जिन्दा होते तो वे अपना रुतबा हिंदी सिनेमा उद्योग में देखकर खुश होते और हो सकता है बेटे की फिल्मों में अविस्मरणीय भूमिकाएं निभाते|

©…[राकेश]


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