पिछली सदी में नब्बे के दशक के अंत में जब भारत और पाकिस्तान अपने अपने परमाणु अभियानों क्रमश: “शक्ति” और “गौरी” की आँच से तप रहे थे तो ग़ालिब के दो सदी बाद मनाये जाने वाले जयंती समारोह “अंदाज-ए.बयां” की मार्फत मशहूर पाक शायर मरहूम अहमद फराज़ साब द्वारा पढ़ी गयी निम्नलिखित कविता प्रकाश में आयी थी।

Dove Talk के दूसरे भाग में प्रस्तुत है भारत के मशहूर शायर मरहूम अली सरदार जाफ़री साब की कविता जो उन्होंने पाक शायर अहमद फराज़ साब के कलाम के जवाब में पढ़ी थी।

पाक शायर अहमद फ़राज़ को शुक्रवार, 9 जुलाई 1999 लिखी कविता



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