लोगों ने केविन कार्टर की आत्महत्या के इर्द गिर्द मिथक रच दिए हैं| यह सत्य है कि उन्होंने आत्महत्या की लेकिन यह सत्य नहीं कि उन्होंने सूडान में भूख से बेहाल अफ्रीकन बच्चे और उसे घूरते, पास बैठे गिद्ध की चर्चित तसवीर के कारण आत्महत्या की|

यह तसवीर 1993 में केविन कार्टर ने सूडान के सूखे/अकाल पीड़ित क्षेत्र में खींची थी। फोटो मार्च 1993 में New York Times में छपी और 1994 में इस फोटो पर उन्हें Pulitzer Prize मिला और पुरस्कार जीतने के लगभग 4 महीने बाद उन्होंने Johannesburg के पास अपनी कार में कार्बन मोनोऑक्साइड से आत्महत्या कर ली| तब वे मात्र 33 वर्ष के थे|

यह सत्य है कि फोटो छपने के बाद लोगों ने उनकी कटु आलोचना की कि उन्होंने गिद्ध को भगाया क्यों नहीं| जबकि सत्य यह भी है कि फोटो खींचने के बाद उन्होंने गिद्ध को भगा दिया था|, और यह चर्चित फोटो भी जंगल में नहीं बल्कि UN फीडिंग सेंटर के पास खींचा गया था|

जिस बच्चे Kong Nyong की यह तसवीर थी वह उस समय अकाल से बच गया था और बाद में कई साल बाद 2007 में बुखार आने के कारण उसकी मृत्यु हुयी|

केविन कार्टर के फोटोग्राफर दोस्त और साथी थे, Ken Oosterbroek थे, जो 1994 में अपार्टहाइड-विरोधी हिंसा में मारे गए थे।

केविन कार्टरBang-Bang Club” के सदस्य थे और वे दक्षिण अफ्रीका की अपार्टहाइड हिंसा, टाउनशिप किलिंग्स, और सूडान, आदि जगहों में घटनाओं को कवर करते थे। उनके पास PTSD, लगातार मौतें देखने का बोझ, ड्रग्स की समस्या, आर्थिक तंगी और दोस्त की मौत का सदमा था। Pulitzer के बाद भी वे “postpartum depression” जैसी स्थिति में थे।

केविन कार्टर ने आत्महत्या कर ली थी, लेकिन यह सिर्फ उस एक फोटो (“The Vulture and the Little Girl”)* की वजह से नहीं हुई। यह एक जटिल, दुखद सच्चाई है जिसमें उनके पूरे करियर का ट्रॉमा, डिप्रेशन, आर्थिक परेशानियाँ और निजी समस्याएँ शामिल थीं।

[* Note : बाद में पता चला था कि भूख से तडपता बच्चा एक लडकी नहीं एक लड़का था , जिसका नाम Kong Nyong था]|

उन्होंने अपने सुसाइड नोट में लिखा था :-

“I’m really, really sorry. The pain of life overrides the joy to the point that joy does not exist… depressed… without phone… money for rent… money for child support… money for debts… money!!! … I am haunted by the vivid memories of killings & corpses & anger & pain… of starving or wounded children, of trigger-happy madmen, often police, of killer executioners… I have gone to join Ken if I am that lucky.”

बाद में उनकी मौत पर The Death of Kevin Carter नामक डॉक्यूमेंट्री बनी|


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