कुछ साल पहले खोजी पत्रिका ‘तहलका’ की पत्रकार शोमा चौधरी ने आरुषि हत्याकांड में अदालत का निर्णय आने पर अपनी तरफ से खोज की थी और अपने लेख (विस्तृत लेख यहाँ पढ़ा जा सकता है और शोमा दवारा खुलासा किये जाना वाला वीडियो

यहाँ देखा जा सकता है) में उपलब्ध सुबूतों के आधार पर विश्लेषण करते हुए यह सिद्ध किया था कि कैसे पुलिस और सीबीआई ने कोई सुबूत न होते हुए भी तलवार दंपत्ति को अपनी ही बेटी के ह्त्या का आरोपी ठहरा दिया और कैसे गंभीर सुबूतों के होते हुए भी उनके नौकर हेमराज के साथियों को जांच से बाहर रखकर मामले से सच को बिल्कुल ही बाहर निकाल दिया|

पत्रकार अविरुक सेन की किताब ‘आरुषि’ भी ऐसे ही निर्णय पर पहुँचती है| विशाल भारद्वाज दवारा लिखी गई कथा-पटकथा में और शोमा चौधरी के शोधपरक लेख के निष्कर्षों काफी समानताएं हैं बल्कि ऐसा ही लगता है कि शोमा चौधरी के लेख के ऊपर ही फिल्म के लेखन को आधारित किया गया है| अगर देखने में भूल न हुयी हो तो फिल्म शोमा चौधरी के शोधपरक लेख को कोई क्रेडिट नहीं देती|

…[राकेश]

 

इजाज़त https://cinemanthan.com/2013/08/28/ijaazat_1987/


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