

तुम जहाँ हो वहाँ क्या ये मौसम नहीं
क्या नज़ारे वहाँ मुस्कुराते नहीं
क्या वहाँ ये घटायें बरसती नहीं
क्या हम तुम्हे कभी याद आते नहीं
तुम जहाँ हो वहाँ क्या ये मौसम नहीं
ये जमाना हमेशा बेदर्द है
दर्दे दिल पे हाथ रखता नहीं
दिल की फितरत एक रहती नहीं
ज़िंदगी भर वफा करता नहीं
फिर भी जैसे भुलाया है तुमने हमें
इस तरह भी किसी को भुलाते नहींदर्द है मेरे दिल का मेरे गीत में
गीत गाता हूँ मैं
तुम मुझे साज़ दो
रात खामोश है और तन्हा है दिल
तुम कहाँ हो ज़रा दिल को आवाज दो
जो गुजारे थे हमने मोहब्बत में दिन
क्या वो दिन अब तुम्हे याद आते नहीं
तुम जहाँ हो वहाँ क्या ये मौसम नहीं
क्या नज़ारे वहाँ मुस्कुराते नहीं


(Text) © CineManthan & Rakesh
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