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Salman Khan

Toofaan (2021) : ठाकुर बनने को 44 इंच का सीना नहीं चाहिए – परेश रावल

लगभग सभी समाज सेवी संगठनों (एनजीओ) का कुछ साल पहले तक एक आम शगल हुआ करता था (बहुतों का अभी भी है और आगे भी होता रहेगा), कि जब वे मैदान में समाज सेवा करने उतरती थीं तो वे जमीन... Continue Reading →

Dilip Kumar उर्फ़ मोहम्मद युसूफ खान और “भारत रत्न”

क्या दिलीप कुमार और भारत रत्न के बीच कुछ फासले हैं? यह तो सर्वत्र स्वीकृत बात है कि हिन्दी सिनेमा में नायक की भूमिकाएं निभाने वाले अभिनेताओं में वे चुनींदा सर्वश्रेष्ठ अभिनेताओं में से एक रहे हैं बल्कि हिन्दी सिने... Continue Reading →

Mammo (1994) : भारत के बंटवारे और ‘दो राष्ट्र’ के जिद्दी प्रयोग में दबी कुचली ज़िंदगी

...[राकेश]

Jolly LLB (2013) : प्रेमी वकील बाबू vs. कानून के अंधेपन के दलाल

“बाबूजी, पेशाब ज़रा उधर कर लेंगे…यहाँ हमारा परिवार सोता है”, ©…[राकेश]

तुम जहाँ हो वहाँ क्या ये मौसम नहीं (Road To Sikkim 1969): प्रेम में शिकायत से तडपते ह्रदय की भावनाएं व्यक्त करते मुकेश

तुम जहाँ हो वहाँ क्या ये मौसम नहींक्या नज़ारे वहाँ मुस्कुराते नहींक्या वहाँ ये घटायें बरसती नहींक्या हम तुम्हे कभी याद आते नहींतुम जहाँ हो वहाँ क्या ये मौसम नहीं ये जमाना हमेशा बेदर्द हैदर्दे दिल पे हाथ रखता नहींदिल... Continue Reading →

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