प्रख्यात लेखक, नाट्य एवं फिल्म निर्देशक, व अवसरानुकूल अभिनेता श्री रंजीत कपूर की यह पहली प्रकाशित कहानी है जो उन्होंने अप्रैल 1969 में हिंदी की प्रसिद्द साहित्यिक पत्रिका सारिका में छपवाई थी| आगे चलकर जो रचनाकार देश का बेहद लोकप्रिय रंगकर्मी और फ़िल्मी लेखन में एक सम्मानित सितारा बनने जा रहा था, उसकी लिखने एकी यह शुरुआती बानगी है| इस कथा का एक ऐतिहासिक महत्त्व है|

© रंजीत कपूर

First Published in Sarika, April 1969


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