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Cinema, Theatre, Music & Literature

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Legends

पंडित नेहरु और डॉ. राममनोहर लोहिया

समाजवादी चिन्तक और राजनेता डा. राम मनोहर लोहिया, ब्रिटिश राज से स्वतंत्रता पाए भारत में, इसके प्रथम प्रधानमंत्री प. जवाहर लाल नेहरु के घनघोर राजनीतिक आलोचक रहे| परन्तु ब्रिटिश राज से आजादी से पूर्व दोनों बड़े नेताओं के मध्य कैसे संबंध थे यह... Continue Reading →

श्रीपाद अमृत डांगे : ओशो

जब मैंने कहा, तकरीबन बीस बरस पहले, कि आदमी-आदमी समान नहीं हैं, भारत की कम्यूनिस्ट पार्टी (सी.पी.आई) ने मेरी आलोचना करते हुए एक प्रस्ताव पारित किया और कम्यूनिस्ट पार्टी के अध्यक्ष – एस. ऐ . डांगे ने घोषणा की कि शीघ्र ही उनका दामाद,... Continue Reading →

The Art of Reading : Francis Bacon

[ Sir Francis Bacon की एक कविता - The Art of Reading से प्रेरित, विस्तृत की गयी कविता ] ...[राकेश]

Pakeezah (1972) : झूठ को सच बनाता कैमरा

सिनेमा परदे पर मायाजाल रचता है और दर्शक उसमें जानबूझ कर फंसते हैं| कई बार मायाजाल भी झूठे चित्रों से रचा जाता है जिसके बारे में अक्सर दर्शकों को पता नहीं चलता| स्टंट सीन्स में तो जानकार मानकर ही चलते... Continue Reading →

जिजीविषा : महावीर वाया ओशो

कुछ लोगों में कहीं न कहीं जीवन को त्यागने की इच्छा का बीज छिपा रहता है और किसी भी तरह की समस्याओं से घिरने पर वह बीज अंकुरित हो उठता है और ऐसे लोगों में से कुछ लोग आत्मघात की... Continue Reading →

आरंभ की परिणति अवश्य होगी : ओशो और महावीर

ओशो महावीर के जीवन के सहारे अपनी बात कहते हैं| महावीर के जीवन में एक घटना का उल्लेख है, जिस पर एक बहुत बड़ा विवाद चला। और महावीर के अनुयायियों का एक वर्ग टूट गया। और महावीर के पाँच सौ मुनियों... Continue Reading →

ऐसा समां न होता – ज़मीन आसमान (1984)

फिल्म ज़मीन आसमान (1984) में संजय दत्त और अनीता राज पर फिल्माया गीत "ऐसा समां न होता, कुछ भी यहाँ न होता, मेरे हमराही जो तुम न होते" से है, अस्सी के दशक में पंचम द्वारा संगीतबद्ध उन बेहतरीन गीतों... Continue Reading →

राजनीति में विद्यार्थी – भगत सिंह

इस बात का बड़ा भारी शोर सुना जा रहा है कि पढ़ने वाले नौजवान(विद्यार्थी) राजनीतिक या पोलिटिकल कामों में हिस्सा न लें। पंजाब सरकार की राय बिल्कुल ही न्यारी है। विद्यार्थी से कालेज में दाखिल होने से पहले इस आशय की शर्त... Continue Reading →

इंकलाब जिंदाबाद” … भगत सिंह

श्री संपादक जी,माडर्न रिव्यू, आपने अपने सम्मानित पत्र के दिसंबर, १९२९ के अंक में एक टिप्पणी “इंकलाब जिन्दाबाद” शीर्षक से लिखी है और इस नारे को निरर्थक ठहराने की चेष्टा की है। आप सरीखे परिपक्व विचारक तथा अनुभवी और यशस्वी... Continue Reading →

तुम जो जीवित रहोगे मेरी फांसी के बाद …(भगत सिंह)

प्रिय भाई, मुझे दंड सुना दिया गया है और फ़ांसी का आदेश हुआ है। इन कोठरियों में मेरे अतिरिक्त फ़ांसी की प्रतीक्षा करने वाले बहुत से अपराधी हैं। ये लोग यही प्रार्थना कर रहे हैं कि किसी तरह फ़ांसी से... Continue Reading →

भगत सिंह की शहादत

सारे दिन उदास रहने के बादशाम भी अगर उदासी में गुजर जायेऔर हर पलअपनी खामोशी मेंठहर जायेतो लगता है किज़िंदगी का सबसे संवेदनशील हिस्साबगैर छटपटाए मर गया हैया फिरज़िंदगी की नस-नस मेंतेज ज़हर भर गया है। मैं नहीं जानता मेरे... Continue Reading →

M F Hussain : चित्रकार का कवि हो जाना

विश्व प्रसिद्द चित्रकार मकबूल फ़िदा हुसैन ने तूलिका के स्थान पर कलम हाथ में थामी अपने अन्दर उभरती भावनाओं को इस बार काव्य का आकार देने के लिए| विश्व कविता दिवस पर उनकी कविता का उल्लेख प्रासंगिक है...

कवि ‘सच्चिदानंद हीरानंद वात्स्यायन’ से प्रश्न

सच्चिदानंद हीरानंद वात्स्यायन जी ने एक कविता लिखी थी – वात्स्यायन जी की बहुत सी लघु कवितायेँ बड़े और गहरे प्रभाव वाली हैं| उनके रचनात्मक वर्षों में उनकी कविताओं, और अन्य विधाओं के लेखन पर पर्याप्त चर्चाएँ होती ही होंगी, समीक्षाएं और... Continue Reading →

बेग़म अख्तर : मेहर बाबा के दरबार में

7 अक्तूबर 1914 को जन्मीं अख्तरी बाई फैजाबादी 13 वर्ष की आयु की ही थीं जब एक कामांध धनपशु ने उन्हें यौनहिंसा का शिकार बनाया| उस दुर्घटना के फलस्वरूप उत्पन्न कन्या को बहुत सालों तक अख्तरी बाई की छोटी बहन... Continue Reading →

Burman Vs Barman (Sachin Dev + Rahul Dev)

हिंदी फ़िल्म संगीत के महारथी पिता- पुत्र ( सचिन देव बर्मन एवं राहुल देव बर्मन) की जोड़ी के कोलकाता स्थित घर की जर्जर हालत के फोटो में घर के बाहर लगी नेमप्लेट भी सामने आती है| और पत्थर की शिला... Continue Reading →

सांप – (अज्ञेय)

सांप तुम सभ्य तो हुए नहीं, नगर में बसना भी तुम्हें नहीं आया। एक बात पूछूँ-- (उत्तर दोगे?) तब कैसे सीखा डसना... विष कहाँ पाया?

असाध्य वीणा : अज्ञेय

कविता – असाध्य वीणा, विचार, कल्पना, और भाषा तीनों के स्तर पर एक अनूठी कविता है| कविता बेहद खूबसूरत विम्ब रचते हुए आगे बढ़ती है और पाठक को सम्मोहित करके अपने खूबसूरत संसार में खींच ले जाती है और जब तक... Continue Reading →

निष्फल कुछ नहीं – (टैगोर)

भारत के गौरव गुरुदेव रबिन्द्रनाथ टैगोर, एक मानवतावादी, प्रकृतिविद, कवि, चित्रकार, संगीतकार, लेखक, शिक्षाविद, और भारतीय संस्कृति एवम कला के ध्वजवाहक रहे हैं, वे देशों की सीमाओं को पार कर गये हैं और पिछले सौ सालों से भी ज्यादा समय से... Continue Reading →

गांधी बनाम हिटलर

So you want to be a writer?

अमेरिकन पिता और जर्मन माता की संतान के रूप में सन 1920 में जन्मे Charles Bukowski 24 वर्ष की उम्र में अपनी पहली कहानी छपवा पाए और उनकी पहली कविता तब छपी जब वे 35 साल के थे| 39 वर्ष की आयु... Continue Reading →

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