otherendओह्ह्ह्ह मुम्बई तो भारत का New York है और वहाँ नौकरियों का विस्फोट हो गया है

अमेरिकी धनी Kit Hawksin अपने होटल में ठहरी हुयी भारत से अमेरिका गयी प्रिया से मिलने पर  कहता है।

मैं New York को अमेरिका के मुम्बई जैसा समझना चाहूँगी, दोनों ही जगह मानव-संसाधन के क्षेत्र में अपरिमित संभावनायें हैं

आत्मविश्वास से मुस्कुराकर उसकी आँखों में आँखें डालकर प्रिया जवाब देती है।

यह है वर्तमान के भारत की नौजवान पीढ़ी की एक युवती प्रिया सेठी (श्रेया सरन) जो एक अमेरिकन बैंक के क्रेडिट कार्ड का कार्य सम्भालने वाले मुम्बई स्थित एक कॉल सेंटर में कार्य करती है।

निर्देशक James Dodson की यह फिल्म एक रोचक रोमांटिक कॉमेडी है और इसमें दर्शायी गयी प्रेमकहानी की कल्पना वर्तमान समय में सार्थक लगती है।

आर्थिक उदारीकरण के बाद से कॉल सेंटर्स ने भारत में अपना डेरा जमा लिया है। उत्तरी अमेरिका के कई प्रांत जब रात में सोते हैं तो उस समय दिन से जूझते हुये भारत के युवा परिश्रम करके उनकी कम्पनियों का काम कर रहे होते हैं और अपने लिये आजीविका कमा रहे होते हैं। युवावस्था में कदम रखते ही बहुत सारे भारतीय युवाओं को कॉल सेंटर्स की नौकरी ने बहुत अच्छे पारिश्रमिक से परिचित कराया है। कुछ लोग इतने सारे धन को सम्भाल न पाने के कारण इसके दुरुपयोग में ज्यादा सम्मिलित हो जाते हैं और कुछ कम उम्र में मिलती इस धनराशी का सदुपयोग अपने जीवन को संवारने में करते हैं।

प्रिया अपने पिता राजीव सेठी (अनुपम खेर) की कई सालों पुरानी नौकरी के बावजूद उनसे ज्यादा कमाती है। पर इस आर्थिक तरक्की ने उसके दिमाग को गलत दिशा में नहीं भटकाया है। वह एक प्रतिभाशाली और आकर्षक नवयुवती है जो अपने सपनों को साकार करना चाहती है। उसके माता-पिता उसकी जल्द से जल्द शादी कर देना चाहते हैं और वह अभी शादी करना नहीं चाहती और अगर माता-पिता के दबाव में उसे शादी करनी भी पड़े तो भी गृहस्थी की बड़ी जिम्मेदारियों को सम्भालने से पहले वह जीवन को भरपूर जीना चाहती है। आर्थिक स्वावलम्बी होने से उसके सामने आर्थिक मजबूरियाँ नहीं हैं जिससे कि वह जरा सी परेशानी आते ही समझौता करके बैठ जाये।

कॉल सेंटर में अपने रोजमर्रा के कार्य के दौरान वह अमेरिकी बैंक के क्रेडिट कार्ड धारकों से वह एक अमेरिकन Jennifer David के रुप में ही फोन पर बात करती है। ट्रेनिंग के फलस्वरुप वह अमेरिकी लहजे में बोलने में पारंगत है और अमेरिका में रह रहे लोगों को कभी भी उसके लहजे से ऐसा संदेह नहीं होता कि फोन पर जिस युवती से वे बातें कर रहे हैं वह असल में मुम्बई में है। एक अमेरिकी युवक Granger Woodruff (Jesse Metcalfe) के क्रेडिट कार्ड के दुरुपयोग का मामला सामने आने पर वह Granger से अक्सर बातें करने लगती है जिससे कि उसके क्रेडिट कार्ड के साथ हुये घपले को सुलझा सके। लगभग रोज ही टेलीफोन के जरिये होने वाली बातों के जरिये दोनों ही एक दूसरे की बातों में रुचि लेने लगते हैं। प्रिया इंटरनेट से Granger के बारे में काफी जानकारी जुटा लेती है।

इंसान दूसरे इंसान की किसी भी बात के प्रति आकर्षित हो सकता है और लगभग रोज़ाना के स्तर पर टेलीफोन पर होने वाली बातचीत से प्रिया, Granger के प्रति आकर्षित हो जाती है। बातचीत के दोस्ताना रुख से उसे ऐसा लगता है उन दोनों के बीच कुछ है या हो सकता है। उधर Granger भी टेलीफोन पर आवाज के जरिये Jennifer के मीठे स्वभाव, ज्ञान, और सुलझे हुये व्यक्तित्व के प्रति आकर्षित हो जाता है। दोनों किसी तरह की निजी भावनाओं का इज़हार नहीं करते पर दोनों के ही अंदर एक दूसरे से मिलने की चाह जग चुकी है।

मुम्बई में प्रिया के घरवाले उसे अल्टीमेटम दे देते हैं शादी के लिये और दूसरा रास्ता न देखकर वह शादी के लिये हाँ करने से पहले एक जुआ खेलना चाहती है। Granger से बातें करते हुये वह उसे प्रस्ताव देती है कि वे San Francisco में मिल सकते हैं और मुलाकात की जगह और वक्त तय करके वह हवाई यात्रा करके San Francisco पहुँच जाती है और उसी होटल में ठहर जाती है जहाँ Granger भी अपने व्यवसाय के सिलसिले में ठहरा हुआ है।

योजना बनाना और बात है और उसे फलीभूत करना दूसरी बात। Granger तो Jennifer से मिलने के लिये उत्सुक है अतः भारतीय वेशभूषा में खड़ी प्रिया को नजरअंदाज़ करके वह उसके पड़ोस में खड़ी अमेरिकन युवती से पूछता है कि क्या वह Jennifer है? अपनी आँखों से इस प्राकृतिक भ्रम को देखने के बाद प्रिया की हिम्मत नहीं होती कि वह Granger को बताये कि असल में वही Jennifer है। वह निराश होकर होटल से जाने लगती है कि परिस्थितियाँ उसे फिर से Granger से मिलवा देती हैं पर अब Granger उसे प्रिया के रुप में ही जानता है और उसे लगता है कि Jennifer असल में वक्त देकर भी मिलने नहीं आयी।

अब Granger के साथ प्रिया अपने असली रुप में है, वह तो सब जानती है पर Granger को इतना ही पता है वह अभी हाल ही में प्रिया से मिला है। इतनी चालाकी में आदमी गलती भी कर देता है और प्रिया की ये चालाकियाँ और गलतियाँ अच्छी खासी हास्यास्पद स्थितियाँ रच देती हैं। मसलन जब Granger उसे अपना सेलफोन नम्बर देना चाहता है तो वह तत्परता से कह उठती है कि नम्बर तो उसके पास है। वह भूल जाती है कि फोन नम्बर Jennifer के रुप में उसके पास है न कि प्रिया के रुप में।

उधर भारत में उसके परम्परागत माता-पिता की सांस रुक जाती है जब उन्हे प्रिया के अमेरिका जाने के बारे में पता चलता है और यह जानकर तो उनके प्राण हलक में आ अटकते हैं जब उन्हे प्रिया की मित्र जिया (तारा शर्मा) से यह पता चलता है कि प्रिया असल में एक अमेरिकी युवक से मिलने गयी है और संभवतः वह उससे प्रेम करती है।

बस परिवार भी अमेरिका के लिये उड़ जाता है जहाँ उनके रिश्तेदार के यहाँ जन्मदिवस के उपलक्ष्य में समारोह होना है। वे रिश्तेदार के घर ठहरकर प्रिया को खोजना भी चाहते हैं पर उन्हे बताना भी नहीं चाहते कि प्रिया यहाँ कहाँ और क्यों आयी है। उन्हे बस इतना बताया जाता है कि प्रिया अमेरिका आयी हुयी है।

प्रिया और Granger एक दूसरे के साथ ज्यादा से ज्यादा वक्त गुजारने के कारण नजदीक आ रहे हैं। असल में तो दोनों ही एक दूसरे को पहले से ही फोन पर हुयी बातचीत के कारण पसंद करते रहे हैं बस Granger के लिये थोड़ा मुश्किल है क्योंकि प्रिया अमेरिका आने के बाद भी Jennifer के रुप में Granger से फोन पर बात कर चुकी है। इंटरनेट पर जुटायी गयी सामग्री के कारण वह उसकी पसंदीदा चीजों के बारे में भी जानती है। जब उनका सम्बंध उस स्तर पर पहुँच रहा है जहाँ उनकी आँखें तो परस्पर भावों का सम्प्रेषण कर रही हैं और उनके शारीरिक हाव-भाव भी इस बात को प्रदर्शित कर रहे हैं कि उनके अंदर एक दूसरे को लेकर पसंदगी से बढ़कर भावनायें उत्पन्न हो चुकी हैं और अब उनके दिल किसी भी समय उन्हे प्रेरित कर देंगे जिससे कि वे बोलकर अपनी प्रेममयी भावनाओं का इज़हार कर दें, उसी समय प्रिया का परिवार उसे खोजने के लिये अपने रिश्तेदार के घर से कूच कर चुका है।

भावनाओं के प्रदर्शन से पहले ही अगर Granger को पता चल जाये कि असल में प्रिया और Jennifer एक ही युवती के दो रुप हैं तो क्या उनका सम्बंध आगे बढ़ेगा? प्रिया का दोहरा व्यक्तित्व क्या Granger को झटका नहीं दे जायेगा? प्रिया कैसे इस दोहरे रुप से मुक्ति पाकर एक ईमानदार इंसान के रुप में अपने को प्रस्तुत कर पायेगी?

एक धनी युवक से प्रिया की शादी तय कर चुके प्रिया के माता-पिता क्या एक विदेशी युवक Granger को अपनी बेटी के वर के रुप में स्वीकार करेंगे?

परिस्थितियाँ भावनायें, रोमांस, और कॉमेडी उत्पन्न करती हैं। अपने होटल के लिये Granger से विज्ञापन बनवाने वाले Kit Hawksin (Larry Miller) और Granger का दोस्त Charlie (Austin Basis) दोनों फिल्म में हास्य बिखेरते रहते हैं। Kit Hawksin को या तो सिर्फ वे लोग पसंद हैं जो उनके सामने बेहद कम बोलें या ऐसे लोग जो वही सब बोलें जो उन्हे पसंद भी आये।

ज्यादातर फिल्मों में अगर नायक का दोस्त Charlie जैसा हंसोड़ हो तो उसे अक्सर जोकर के रुप में दिखाया जाता है और नायक न केवल उसका उपहास करता रहता है बल्कि उससे भावनाओं के स्तर पर जुड़ा नहीं रहता पर इस फिल्म की यह खासियत है कि Granger वाकई Charlie की भावनाओं की कद्र करता है और उसकी शादी के मौके पर बेस्ट मैन के रुप में उसकी साहसी प्रकृति की सब लोगों के सामने तारीफ करता है। उससे सबक सीखता है। प्रेम पर आधारित फिल्म में मित्रता भी अपने आदर्श रुप में सामने आती है।

फिल्म के चरित्र एकरंगी रुप में सामने न आकर बहुरंगी लगते हैं और इसलिये दर्शक को रोचक लगते हैं।

Granger अमेरिकन है, अपने क्षेत्र में वह सर्वश्रेष्ठ बनना चाहता है पर अपने इस लक्ष्य को लेकर कहीं उसके अंदर आत्मविश्वास की कमी है। प्रिया से मिलकर, उससे बात करके वह उसके आत्मविश्वासी रुप से प्रभावित होता है। प्रिया अपने प्राकृतिक रुप से सहज ही लोगों को मोह लेती है।

आर्थिक स्वावलम्बी प्रिया बुद्धिमान है, खूबसूरत है और वह निर्णय ले सकती है और अपने या अपने देश को लेकर किसी किस्म की कुंठा नहीं है। वह अपने विचारों में स्पष्ट है और उनकी अभिव्यक्ति में निडर।

फिल्म भारत स्थित कॉल सेंटर के काम करने की विधि को समुचित विस्तार से दिखाती है और फिल्म की गुणवत्ता का मह्त्व इसलिये भी बढ़ जाता है कि बहुत सारे भारतीय चरित्रों से भरी इस फिल्म को The Guru (2002) की लेखिका Tracey Jackson ने लिखा है। फिल्म स्पष्ट दर्शाती है कि उन्हे भारतीय चरित्रों की समझ है और वे एक विदेशी लेखक की लेखनी से अटपटा सा अस्तित्व न पाकर सहज रुप से भारतीय ही लगते हैं। प्रिया और उसके परिवार वालों के लिये एकदम से अमेरिका के लिये उड़ना अस्वाभाविक लगता है पर फिल्म की मूल भावना को देखते हुये ऐसी छोटी बातें फिल्म को प्रभावित नहीं करतीं। एक चरित्र किरन जुनेजा का जरुर ऐसा है फिल्म में कि दर्शक को पता चलना मुश्किल है कि फिल्म उनकी उपस्थिति का क्या उपयोग कर रही है? अनुपम खेर का व्यक्तित्व कुछ कृत्रिम किस्म का हो गया है। लगभग पूरी फिल्म में पहले तो वे एक हायपर पिता के रुप में कुछ कुछ मसखरे सरीखा व्यवहार करते हैं, ऐसा जैसा उन्होने कभी पूजा भट्ट के पिता के रुप में दिल है कि मानता नहीं में किया था और अंत में वे एकदम से सुलझे और संवेदनशील पिता बन जाते हैं जो अपनी बेटी की भावनाओं को सही रुप में समझने वाले और अपनी भावनाओं को गम्भीरता से प्रस्तुत कर सकते हैं। निर्देशक शुरु से ही उनके हायपर रुप को नियंत्रित कर सकते थे और तब उनके चरित्र-चित्रण में एक निरंतरता बनी रहती।

Jesse Metcalfe और श्रेया सरन दोनों ही रोमांटिक भूमिका में सहज लगे हैं और दोनों ने ही अपने-अपने चरित्रों के मध्य रिश्तों के बनते बिगड़ते समीकरण को बखूबी निभाया है। न तो कहानी में और न ही उनके अभिनय में थोपा हुआ कृत्रिम भाव है और इसलिये उनकी प्रेम कहानी रोचक रुप से संभव लगती है।

एक इंडो-अमेरिकन कहानी को यह फिल्म आकर्षक रुप से एक रोमांटिक कॉमेडी के रुप में दर्शक को लुभाती है। निर्माता अशोक अमृतराज की यह फिल्म ऐसे और ज्यादा प्रयासों के लिये संभावना के दरवाजे खोलती है।

…[राकेश]

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