Lake Tahoeमैक्सिकन निर्देशक Fernando Eimbcke की फिल्म Lake Tahoe एक रोचक फिल्म है जो दिखाती है कि जीवन में कुछ घटित होने के बाद उससे प्रभावित लोग कैसे अपनी अपनी प्रतिक्रियाएं देते हैं| अगर किसी व्यक्ति की मृत्यु अचानक से हो जाए तो उसके बारे में बहुत कुछ उन लोगों के बताये किस्सों से चलता है जो कि मृत व्यक्ति के जीवित रहते उससे जुड़े रहे थे और बहुत से मामलों में वे उस पर निर्भर थे और जिन्हें अब उसकी यादों के साथ जीना है| उस व्यक्ति के बिना जीना और जीवन की कठिनाइयों से जूझना उन्हें अब अपने आप सीखना होता है|

कभी कभी यह बात महत्व नहीं रखती कि कोई घटना किस तरह से घटित हुयी बाकि इस बात का ज्यादा महत्व होता है कि इस जीवन में घटित को स्वीकार कर लिया जाए|

जुआन नाम के एक किशोर ने अपनी कार बिजली के खम्बे से टकरा दी है| यह घटना और ऐसी बहुत सी घटनाएं निर्देशक दिखाता नहीं है बल्कि सुनवाता है और बाद अँधेरे से परदे से कार के टकराने की आवाज दर्शकों को सुनाई देती है और जब उजाले से भरा दृश्य परदे पर उभरता है तब दर्शक देख पाते हैं कि कार क्षतिग्रस्त अवस्था में खम्बे से सटी हुयी खड़ी है| जुआन को अब एक ऐसे कार मैकेनिक को खोजना है जो घटनास्थल पर आकर उसकी कार की मरम्मत कर दे|

हाल ही में जुआन के पिता का अचानक ही देहांत हो गया है और पिता पर निर्भरता से एक लीक पर चल रहा उसका जीवन भी ढर्रे से उतर गया है| दोनों बातें दो समान्तर संसार बना कर चलती हैं फिल्म में| जुआन को अपने जीवन को पटरी पर लाना है और अपनी कार की मरम्मत भी करानी है| जुआन के जीवन के एक दिन की कथा दिखाती है यह फिल्म|

कथा के स्तर पर बहुत पेचीदा या महान कथा के ऊपर यह फिल्म नहीं बनी है| एक सादा सी कथा है फिल्म की, और किरदार भी सामान्य से लोग हैं| एक महान फिल्म बनाने का उद्देश्य सामने नहीं आता परन्तु जिस तरीके से फिल्म को प्रस्तुत किया गया है, विजुअल्स के स्तर पर फिल्म बेहद आकर्षक और रोचक लगती है|

क्या हमें जीवन में अन्य लोगों की जरुरत होती है? क्या ऐसे जटिल दौर में जब हम जीवन के बहुत सारे क्षेत्रों में अन्य लोगों पर निर्भर रहते हैं बिना अन्य लोगों के जीवन को सुचारू रूप से जी सकते हैं?

दुर्घटनाग्रस्त कार को ठीक करवाने के लिए जुआन को एक मेकेनिक चाहिए क्योंकि वह स्वयं कार ठीक नहीं कर सकता, क्योंकि उसे कार ठीक करना नहीं आता| वह उस सोते हुए से छोटे से कस्बे नुमा शहर में एक अदद मेकेनिक की तलाश में है|

इसी तर्ज पर जीवन के अन्य क्षेत्र भी हैं जहां एक आदमी अपने आप सब कुछ ठीक करने या रखने में असमर्थ होता है क्योंकि उन क्षेत्रों का उसे भली भांति ज्ञान नहीं होता| इन सब क्षेत्रों में उसे बेहतर सलाह या सहायता की जरुरत होती है| उसे दोस्तों की जरुरत हो सकती है, भावनात्मक रूप से उसे परिवार के सदस्यों के सहारे की जरुरत हो सकती है| दूसरों से मिलना जुलना, उनसे बात करना जीवन के बारे में एक समझ उत्पन्न करता है| जीवन में घटनाएं घटती ही रहती हैं, और व्यक्ति को प्रभावित करती रहती हैं और वह प्रतिक्रया देता रहता है और अनुभव से एक समझ विकसित कर्ता रहता है| दूसरों के अनुभव से ली गई सीख भी इसमें इजाफा करती है| .

जुआन के पिता के आकस्मिक देहांत के बाद से ही उसकी माँ ने अपने को कमरे में एकांत में बंद कर लिया है| जुआन के छोटे भाई को पिता के न रहने से होने वाले कठिनाइयों के गहरे एहसास होने बाकी हैं| अपने पिता के एकामी को दोनों भाई महसूस तो कर रहे हैं पर उन एहसासों की तीव्रता और गहराई में अंतर है| .

ऐसे समय से उपजी मानसिक परेशानियों की हालत में कुंठित जुआन घर से बाहर आता है और कार की दुर्घटना उसकी कुंठा को और बढ़ा देती है| उसके कार सड़क पर कोमा में पड़ी है और वह मेकेनिक की तलाश में निकल पड़ता है| इस खोज के दौरान उसे कुछ रोचक लोग मिलते हैं और उसके इन लोगों से मिलने से उत्पन्न ह्यूमर के जरिये निर्देशक एक रोचक फिल्म को रच देता है|

जुआन एक वृद्ध मेकेनिक से मिलता है जो कि अपने कुत्ते के साथ रहता है| वृद्ध मेकेनिक के लिए जुआन का अस्तित्व उसकी दैनिक दिनचर्याओं के समक्ष नगण्य है| वृद्ध जुआन को खाने की टेबल पर अपने साथ बिठा कर खाना खाता है, उसी टेबल पर अपने कुत्ते को खिलाता है पर जुआन से खाने के लिए नहीं पूछता| खाने के बाद वह जुआन को विवश करता है कि वह उसके कुत्ते को बाहर घुमा कर लाये क्योंकि वह कुत्ते को उसके जरुरत के लायक नहीं घुमा सकता| |

 

जुआन ऑटो पार्ट्स की दुकान चलाने वाली एक युवती से मिलता है, जिसे गर्व है कि उसने अपने बेटे का नाम Fidel रखा है| युवती को आराम करने के लिए जुआन को बेबी सिटर बनाने में कोई हिचक होती और रात में वह बाहर एक संगीत कार्यक्रम को देखने जाना चाहती है|

जुआन की उम्र के आसपास का एक मेकेनिक उससे टकराता है, जो कि ब्रूसली और मार्शल आर्ट का जबर्दस्त प्रशंसक है| वह अकेला ऐसा है जो जुआन के जीवन में उस दिन घट रही घटनाओं में दिलचस्पी लेता है| वाहे इक ऐसा है जो जुआन को दर्शन शास्त्र की खुराक देता है|

वह अपने गुरु ब्रूसली की प्रसिद्द फिल्म Enter the Dragon से संवाद उधार लेकर जुआन को सुनाता है “Emotional content is needed and not the anger”,

जुआन के पास कार ठीक करने के लिए जरूरी एक मंहगा पूर्जा खरीदने के लिए आवश्यक पैसे नहीं हैं और उसे दिक्कत नहीं होती अपने नये मित्र बने मेकेनिक के साथ अपने पूर्व परिचित परिवार की कार से उस पुर्जे को चुराने में| वह परिवार उसे कुछ तोहफे भी देता है|

दुख, कष्ट, और कुंठा ऋणात्मक भाव व्यक्ति के अंदर ऋणात्मक उर्जा का प्रवेश करा देते हैं और उसे और ज्यादा विचलित कर देते हैं| इस ऋणात्मक ऊर्जा को निकास चाहिए क्योंकि यदि यह व्यक्ति के अंदर ही बसी रहे तो वह अशांत हो जाता है| ऐसा अक्सर देखा जाता है कि अगर कोई व्यक्ति इस ऋणात्मक ऊर्जा का प्रबंधन सही तरीके से नहीं कर पाता तो इस उर्जा एके वशीभूत होकर वह हिंसक हो जाता है| ऊर्जा के इस हिंसक उबाल से घिरा आदमी कई तरह के अपराध कर सकता है, ये अपराध प्रकृति में हिंसक भी हो सकते हैं और सेक्सुअल भी|

इस ऋणात्मक ऊर्जा को केवल ध्यान के प्रबंधन या किसी ऐसी गतिविधि के दवारा ही संयमित और नियंत्रित किया जा सकता है, जिस गतिविधि से ऊर्जा रचनात्मक कार्य में परिवर्तित हो जाए|

जुआन का नया दोस्त, युवा मेकेनिक उसके सामने मार्शल आर्ट का प्रदर्शन करता है और उसे समझाना चाहता है कि ऊर्जा के प्रबधन के लिए यह भी एक बहुत सहायक कला है| वह उसे दर्शन भी देता है पर जुआन की समझ में कुछ नहीं आता और वह हिंसक होकर बेसबॉल के बैट से अपने कार के बोनट पर वार करता है|

प्रेम भी ऋणात्मक ऊर्जा को रूपांतरित कर सकता है पर जुआन की माँ अपने पति की मृत्यु के दुख से इस कदर ग्रसित है कि कुंठा में वह अपने पुत्रों के बारे में भी भूल कर अपने को एकांतवास का कैदी बना लेती है|

शारीरिक संबंध को भी मानव अपने अंदर संचित उर्जा की उथल पुथल को शांत करने के लिए इस्तेमाल में लाता है| जुआन को भी ऑटो पार्ट्स की दुकान चलाने वाली युवती की बाहों में सुकून मिलता है, जो कि अपने बेटे को अकेले पालने की दिक्कतों के कारण कुंठित हो चुकी है| वह जुआन को क्षणिक सहारा देती है और उससे तात्कालिक सहारा लेती है|

लेकिन इससे पहले खुद जुआन भूल जाता है कि इस कठिन घड़ी में जैसे उसे भावनात्मक सहारे की जरुरत है उसके छोटे भाई को तो उससे कहीं ज्यादा बड़े सहारे की जरुरत है| भटकाव के उस दिन कुछ लोगों से मिल कर उसकी समझदारी में वृद्धि होती है|

जब वह वृद्ध मेकेनिक के कुत्ते को घुमाने ले जाता है तो वह उसका साथ छोड़ कर भाग जाता है| अपने एकार के ठीक होने के बाद जुआन कुत्ते को खोजने निकलता है तो देखता है कि वृद्ध भी सड़क पर कुत्ते को खोज रहा है| दोनों लोग खोज जारी रखते हैं तो पाते हैं कि कुत्ता किसी और घर में बच्चों के साथ खेल रहा है| जुआन कुत्ते को लाना चाहता है पर वृद्ध उसे रोक देता है और कहता है कि कुत्ते को नये घर में ही रहने दो|

संभवत जुआन भी समझ जाता है कि अपने कुत्ते से अत्याधिक प्रेम करने के कारण वृद्ध चाहता है कि कुत्ता नये घर में सुरक्षित रहे क्योंकि उसकी अपनी जिंदगी का भरोसा नहीं, कितने दिन और जियेगा और उसके मरने के पश्चात कुत्ते के लिए बहुत परेशानी खड़ी हो जायगी| अच्छा है अगर उसे नया घर मिल जाए| सामन्यतः पालतू कुत्तों के लिए अपने आप अपना पुराना घर चुदना एक तरह से असंभव है, और कुत्ता कुछ समय पश्चात वापिस वृद्ध के पास आ जायेगा लेकिन इस बहाने से फिल्म जुआन की समझ को विकसित होते हुए दिखाती है कि वह देख और समझ पाता है कि अपने कुत्ते के प्रेम के वशीभूत उसकी भलाई के लिए वृद्ध उससे जुदाई का गम भी सहने को तैयार है| .

युवती से शारीरिक संबंध बनाने के पश्चात शांत चित्त जुआन सुबह घर वापिस आता है| अब उसके पास इच्छा है कि वह अपनी माँ को दुख से उबारेगा और अपने छोटे भाई की जरूरतों का ख्याल रखेगा| वह अब जीवन में आगे बढ़ने के लिए मानसिक रूप से तैयार है| जीवन को चलना है|

पतझड़ के बाद बसंत को आना ही है| बसंत के दौरान प्रकृति को सबसे खूबसूरत रंग चारों ओर बिखेरने होते हैं, पेड़ों पर ताजी पत्तियों और फूलों का वास होना होता है| चिड़ियों को खुशी में चहक कर दुनिया की सबसे बेहतरीन सिम्फनी रचनी होती हैं जो कि किसी मानव के लिए संभव न हो पायें|.

मानव व्यवहार के स्तर पर देखें तो प्रतीत होता है कि स्क्रिप्ट में चरित्र विकास के मामले में बहुत अच्छा काम किया गया|.

तकनीकी रूप से भी हर फिल्म अपनी भाषा होती है और का अपना व्याकरण होता है (हर अच्छी फिल्म का तो होता ही होता है)| इस फिल्म को सिनेमोटोग्राफी के तौर पर देखें तो कैमरा स्थिर रहता है और चरित्र या तो फ्रेम में प्रवेश करते हैं या इससे बाहर निकलते हैं| ज्यादातर कैमरा चरित्रों से एक दूरी बना कर रखता है और बेहद कम संख्या में ही क्लोज-अप शॉट्स होंगे फिल्म में, अधिकतर शॉट्स तो मध्यम या बहुत ज्यादा दूरी से फिल्माए गये हैं| हालांकि फिल्म जुआन के जीवन का ऐसा दिन दिखा रहा है जो उसके जीवन का सबसे परेशानी वाला दिन है पर तब भी कैमरा एक दूरी बरतते हुए उसके जीवन के एक दिन की घटनाओं का प्रदर्शन करता है| उसकी मनोवैज्ञानिक यात्रा पर ध्यान केंद्रित नहीं किया गया है बल्कि इस बात को उकेरा गया है कि वह किन परिस्थितियों से गुजर रहा है| यहाँ तक कि उसके साथ घट रही घटनाओं के असर की अनवरतता को तोड़ने के लिए कुछ सेकेण्ड लंबे पूर्ण अन्धकार में डूबे क्षण परदे पर आते हैं और कथा की एकरसता को भंग करते हैं|

फिल्म की गति धीमी है जो एक छोटे से कसबे नुमा शहर के जीवन की गति से पूर्णतया मेल खाती है| Jump-cut विधि से किया गया फिल्म का संपादन फिल्म में एक खास असर उत्पन्न करता है और जिस तरह से जुआन उसके जीवन में घट रही घटनाओं का साक्षी बनता है उसी तर्ज पर दर्शक दृश्यों को देख पाते हैं|

जुआन की कार ठीक होने से पहले फिल्म की गति बेहद धीमी है और कार ठीक होने के उपरान्त न केवल कार सही तरीके और सही रास्ते पर दौड़ने लगती है बल्कि उसकी ज़िंदगी भी सही समझ के सतह चलने लगती है और जैसे जैसे घटनाएं घटती हैं वैसे वैसे वह समझ परिपक्व करता जाता है|

दूसरे देश की कहानी, विदेशी भाषा में, विदेशी चरित्रों को समाहित फिल्म देखने में एक अलग आकर्षण होता है और जब फिल्म और उसके चरित्र दर्शक से संबंध बना लेते हैं तो दर्शक को मानव जीवन की विराटता और लघुता दोनों का अनुभव होता है कि कहीं भी रहे दुख सुख और रिश्ते सब कुछ तो एक सा ही होता है मानव जीवन में|

फिल्म को पसंद या नापसंद करने की बात से अलग हट कर यह फिल्म नये और कम अनुभवी निर्देशक के लिए एक शिक्षक की भूमिका निभा सकती है|

…[राकेश]

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