जब स्वामी विवेकानंद बाद में बेहद प्रसिद्द हो जाने वाली शिकागो की यात्रा हेतु भारत से शिकागो वाया वैंकुवर पहुँच रहे होंगे तब भारत में सिनेमा अपनी पहली मुंह दिखाई कर रहा था|

July 1896 के पहले सप्ताह में जब भारतीयों ने सिनेमा नामक नए अविष्कार का पहला विज्ञापन पढ़ा होगा तो उनकी उत्सुकता के बारे में केवल अंदाजा ही लगाया जा सकता है| और जिन्होंने वाकई में उस जमाने में बहुत मंहगे टिकट (1 रुपया प्रति व्यक्ति) लेकर सिनेमा के उस रूप के दर्शन किये होंगे, उनकी प्रतिक्रिया को अखबारों और उस दौर की पत्रिकाओं को दर्ज करनी चाहिए थीं|


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