ज़िन्दगी रोज नये रंग में ढ़ल जाती है कभी दुश्मन तो कभी दोस्त नज़र आती है। कभी छा जाये बरस जाये घटा बेमौसम कभी एक बूँद को रुह तरस जाती है ज़िन्दगी रोज नये रंग में ढ़ल... Continue Reading →
ज़िन्दगी रोज नये रंग में ढ़ल जाती है कभी दुश्मन तो कभी दोस्त नज़र आती है। कभी छा जाये बरस जाये घटा बेमौसम कभी एक बूँद को रुह तरस जाती है ज़िन्दगी रोज नये रंग में ढ़ल... Continue Reading →
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