मल्लिकार्जुन मंसूर के संगीत संसार में डूबकी लगाकर कवि अशोक वाजपेयी वापिस इस संसार में आते हैं तो अपने संगीत में रमे मल्लिकार्जुन मंसूर की बहुत सी छवियाँ ही नहीं लाते वरन अपनी उत्सुकता से उनके संगीत संसार की संरचना... Continue Reading →
आई ऋतु सावन की पिया मोरा जाये रे आई ऋतु सावन की। बैरन बिजुरी चमकन लागी बदरी ताना मारे रे, ऐसे में कोई जाए पिया, ऐसे में कोई जाए पिया. तू रूठो क्यों जाये रे, आई ऋतु सावन की। तुम... Continue Reading →
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