आई ऋतु सावन की

पिया मोरा जाये रे

आई ऋतु सावन की।

बैरन बिजुरी चमकन लागी

बदरी ताना मारे रे,

ऐसे में कोई जाए पिया,

ऐसे में कोई जाए पिया.

तू रूठो क्यों जाये रे,

आई ऋतु सावन की।

तुम ही अनुक बिदेस जाईया

सब आये है द्वार रे,

ऐसे में कोई जाए पिया,

ऐसे में कोई जाये पिया,

तू रूठो क्यों जाये रे

आई ऋतु सावन की।

बैरन बिजुरी चमकन लागी

बदरी ताना मारे रे,

ऐसे में कोई जाए पिया,

…[राकेश]


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