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Cinema, Theatre, Music, Literature & Life

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Indian Cinema

Anand (1971) : जीने का अंदाज अंकुरित कर जाने वाला जिंदादिल

...[राकेश]

Katha (1983) : सीधा-सच्चा, आदर्शवादी और अंतर्मुखी पुरुष बनाम जालसाज, झांसेबाज छलिया !

© ...[राकेश]  

Pratidwandi(1970) : वास्तविक समस्याएं जीवन में समझौते करने का दबाव बनाती हैं!

जीवन हमेशा ही पलक झपकते ही अपना रुख बदल लेता है| बस एक क्षण का समय ही पर्याप्त होता है जीवन की दिशा बदलने वाली घटना के घटित होने के लिए| आसानी से चल रहा जीवन एक तीव्र मोड़ ले... Continue Reading →

Mammo (1994) : भारत के बंटवारे और ‘दो राष्ट्र’ के जिद्दी प्रयोग में दबी कुचली ज़िंदगी

...[राकेश]

Kalyug (1981) : महाभारत के संघर्ष आधुनिक परिवेश में

...[राकेश]

Manjhi : The Mountain Man (2015) – जुनूनी आशिक की दास्तान है प्यारे

अपने ‘मैं’ को खोकर जिसे पाते वह सौगात ‘प्रेम’ की! प्रेम में पहले दूसरा स्वयं से महत्वपूर्ण हो जाता है फिर दोनों के ‘मैं’ कुछ समय के लिए एक हो जाते हैं और एक समय आता है जब व्यक्ति को... Continue Reading →

Ahalya (2015) : वासना का खतरनाक प्रलोभन

 ...[राकेश] इच्छुक लोग फिल्म को यहाँ देख सकते हैं https://cinemanthan.com/2014/05/30/kahaani2012 https://cinemanthan.com/2015/05/12/piku2015

हिंदी सिनेमा का अनूठा संन्यासी सुपर अभिनेता स्टार

सन 1984 के किसी दिवस की बात है| एक शिष्य अपने गुरु दवारा बसाए गये शहर में उनके आवास के बाहर रोते हुए गुरु की निजी सचिव से कह रहा है,” भगवान, ने मुझे किस मुसीबत में डाल दिया| मुझे... Continue Reading →

Drishyam(2015) : लुका छिपी – अहंकारी पुलिस अधिकारी बनाम सिनेमा भक्त चौथी फेल आम आदमी

जिसने ‘दृश्यम’ फिल्म का मूल मलयाली संस्करण (मोहन लाल अभिनीत) और कमल हसन अभिनीत तमिल संस्करण नहीं देखे हैं उनके लिए फिल्म का अजय देवग्न अभिनीत हिंदी संस्करण एक अच्छे थ्रिलर देखने का आनंद प्रस्तुत करता है और मूल मलयाली... Continue Reading →

Masaan (2015) : खिलने से पहले फूलों को खिज़ा खा गई

‘  ऐसे जीवन भी हैं जो जिए ही नहीं जिनको जीने से पहले ही मौत आ गई फूल ऐसे भी हैं जो खिले ही नहीं जिनको खिलने से पहले खिज़ा खा गई ...[राकेश] ©

हमने देखी हैं उन आँखों की महकती खुशबू (Khamoshi 1969) : अनूठे मुखड़े से सजा प्रेमगीत ग्रंथ

...[राकेश] https://youtu.be/doPtBhDTpj0?si=st9Jv6ShXnVzrATS https://cinemanthan.com/2013/10/04/khamoshi1969 ©

Ugly (2014) : असंवेदनशीलता और खुदगर्जी से सड़ते रिश्तों की बजबजाती गंदगी में मरता बचपन

 ...[राकेश] Bombay Velvet https://cinemanthan.com/2015/05/19/bombayvelvet2015/

Tanu Weds Manu Returns (2015) : कंगना रनौट की प्रतिभा का विस्फोट

   ©...[राकेश]   Tanu Weds Manu (2011)

Bombay Velvet (2015) : अपराध और मुर्दों के टीलों पर बसी शहरी बस्ती के बसने की गाथा

© ...[राकेश]

Piku (2015) : हाजत हजार नियामत

...[राकेश]

किशोर कुमार : सवेरे वाली कुनमुनी, कुरमुरी लालिमा की छुअन जैसा गायन

©...[राकेश]  

Holi (1984) : केतन मेहता की, फिल्ममेकिंग पर, रची गाइड

...[राकेश]

Jai Ho! Democracy : भारत-पाक तनाव की निरर्थकता को उकेरती एक एंटी वार फिल्म

भारत- पाकिस्तान के बीच तनाव का आलम ऐसा है कि बिना आग भी धुआँ उठ सकता है और बिना मुददे के भी दोनों देश लड़ सकते हैं, इनकी सेनाएं जंगे-मैदान में दो –दो हाथ न करें तो क्रिकेट के मैदान... Continue Reading →

7 Khoon Maaf (2011) : तत्वविज्ञानी रस्किन बांड+विशाल भारद्वाज की मार्फ़त Susanna का दृष्टांत

ऐसी फिल्में हिन्दी सिनेमा में बनती नहीं है अतः ऐसे प्रयासों का समुचित रुप से सही मूल्यांकन होना चाहिये और केवल बॉक्स ऑफिस की सफलता को ही पैमाना बनाकर ऐसी फिल्मों की संभावनाओं को नष्ट नहीं करना चाहिये। ...[राकेश] ©

NH 10 (2015) : जंगल राज में दबंग भेड़ियों के खिलाफ घायल हिरनी की प्रतिहिंसा

“मैडम जी, शहर में जहां बड़े बड़े मॉल खत्म हो जाते हैं न बस डेमोक्रेसी भी वहीं समाप्त हो जाती है”| एक पुलिस इन्स्पेक्टर फिल्म की नायिका मीरा (Anushka Sharma) से कहता है और उसे समझाता है कि पुलिस वाले... Continue Reading →

रंजीत कपूर : थियेटर के एवरेस्ट पर झण्डारोहण से फिल्मों के सृजन तक

...[राकेश]

शशि कपूर : ‘दादा साहेब फाल्के’

...[राकेश]

Mausam(2011) : काश अच्छे आगाज़ की तरह अंजाम भी बेहतर दे देते पंकज कपूर

आगाज़ तो होता है अंजाम नहीं होता जब मेरी कहानी में वो नाम नहीं होता जब जुल्फ की कालिख में घुल जाये कोई राही बदनाम सही लेकिन गुमनाम नहीं होता हँस-हँस के जवां दिल के हम क्यों न चुनें टूकड़े... Continue Reading →

Kahaani (2012): विद्या बालन की थ्रिलर फिल्म

इन्स्पेक्टर सात्यिकी की भूमिका में Parambrata Chatterjee सहज और आकर्षक लगे हैं| विद्या बालन के अलावा सबसे ज्यादा ध्यान खींचते हैं Saswata Chatterjee जिन्होंने बॉब विश्वास की भूमिका निभाई है| उनकी मुस्कान और उनकी शैतानियत का संगम एक आकर्षक स्क्रीन... Continue Reading →

Sunglass (2013) : दूसरे के मन की बात जान लेना रिश्ते पर भारी पड़ता है

बचपन में एक कथा सुनी थी, बहुतों ने सुनी होगी, दादी-नानी किस्म की कहानी परम्परा वाली| बहुत समय पहले की बात है, शताब्दियों पहले की| तब इंसान का पेट बंद नहीं होता था और उस पर एक ढक्कन किस्म का ... Continue Reading →

Chalo Dilli (2011) : इंडिया का भारत भ्रमण

एक समय तक भारत के हरेक विद्यार्थी को सामान्य ज्ञान की परीक्षाओं में भारत के स्वतंत्रता संग्राम से जुड़े दो प्रश्न काफी परेशान करते थे (शायद अभी भी करते हों)। सवाल थे - दिल्ली चलो का नारा किसने दिया था।... Continue Reading →

डार्लिंग आँखों से आँखें चार करने दो (7 Khoon Maaf 2011)

कौन है भारत में ऐसा जो हिन्दी सिनेमा के संगीत संसार में मौजूद नायाब खजाने से रुबरु हुआ हो और शोला जो भड़के दिल मेरा धड़के (अलबेला-1951) , मुड़ मुड़ के न देख (श्री 420 - 1955), मेरा नाम चिन... Continue Reading →

Shaan(1980): शोले की आन, बान और शान में घटोत्तरी

https://youtu.be/IQ-iTeN_Yv4?si=PRGH5MxznvZ2bmqX https://youtu.be/B_qbaictKdE?si=7zhObOZKvOOMSSwu   ...[राकेश]

नवीन निश्चल : सौम्य चरित्रों के अभिनेता

...[राकेश]

Angoor (1982) : विशुद्ध हास्य की मधुशाला

    …[राकेश]

कमर जलालाबादी

...[राकेश]

महंगाई डायन खाए जात है : अभावग्रस्त भारत की टीस को उकेरता व्यंग्य गीत

©...[राकेश]

Satyakam (1969) : हत्या ईमानदारी की होते बेशर्मी से देखता रहा है हिन्दुस्तान

Jolly LLB (2013) : प्रेमी वकील बाबू vs. कानून के अंधेपन के दलाल

“बाबूजी, पेशाब ज़रा उधर कर लेंगे…यहाँ हमारा परिवार सोता है”, ©…[राकेश]

Tanu Weds Manu(2011): सोती चिंगारी के प्रेम में पड़ गया घोंचू

©…[राकेश] रोड टू संगम , वेल डन अब्बा, सिटी ऑफ गोल्ड, पीपली लाइव, धोबी घाट,

Dhobi Ghat (Mumbai Diaries) : ऐ दिल है मुश्किल जीना यहाँ

©…[राकेश] दस्तक Dastak (1970): हदों से गुज़र, जीने की कोशिश करते, हामिद और सलमा: पीपली लाइव Peepli Live(2010): न्यू इंडिया और इसके मीडिया के मुँह पर तमाचा लगाता गरीब देहाती हिन्दुस्तान

Kissa Kursi Ka : लालकृष्ण आडवाणी से एक करोड़ मुआवजा मांगते अमृत नाहटा का पत्र

नोट: शैक्षणिक व अव्यवसायिक उपयोग के लिये हिन्दी सिनेमा के इतिहास से सम्बंधित एक विवादास्पद फिल्म के निर्माता के पत्र का हिंदी रुपांतरण प्रस्तुत किया गया है।

Kissa Kursi Ka : हिंदी सिनेमा की सबसे ज्यादा विवादास्पद फिल्म का इतिहास

नोट: शैक्षणिक व अव्यवसायिक उपयोग के लिये हिन्दी सिनेमा के इतिहास से सम्बंधित एक विवादास्पद फिल्म के निर्माता के लेख का हिंदी रुपांतरण प्रस्तुत किया गया है।

नमकीन (1982) : चौरंगी में झांकी चली

https://www.youtube.com/watch?v=hLWJ3pWy2ac https://www.youtube.com/watch?v=erkeCqZp7os …[राकेश]

Dus Tola (2010) : गुलज़ार की सोने की खान से कुछ स्वर्ण-मुद्राएं

  …[राकेश]

Jagte Raho (1956): न जागा है न जागेगा “भारत”

    ...[राकेश] https://youtu.be/S3Lhs8HEC_I?si=633obFDq1l4icFzN

Maya (2001) : गढी हुयी सामाजिक कुरीति के नाम कन्या की बलि चढाती फिल्म

©...[राकेश]

Road to Sangam (2010) : गाँधी कलश यात्रा

...[राकेश]

Khela(2008): ऋतुपर्णो घोष, नये अंदाज में

©...[राकेश]

Well Done Abba (2010): गरीबी और सिलिकॉन इम्प्लान्ट्स के बाजार के बीच फंसे देश की हास्यास्पद स्थिति

“वेल डन अब्बा“ अभाव और समृद्धि के निर्लज्ज प्रदर्शन के दो विरोधी पाटों के बीच पिसते भारत पर व्यंग्य करती एक कहानी को दिखाती है। श्याम बेनेगल इस फिल्म में भ्रष्ट भारतीय समाज में समस्यायों से दो चार होते एक... Continue Reading →

Road Movie (2010): जीना है ज़िन्दगी का धर्म और मर्म

©...[राकेश]

City of Gold (2010) : गरीबी को पटखनी देती अमीरी

महेश मांजरेकर की फिल्म City of Gold अमीरी गरीबी के बीच संघर्ष की राजनीति को दिखाती है। उदारीकरण के बाद से हिन्दी सिनेमा ने गरीब और अमीर के बीच के अन्तर को दर्शाती हुयी फिल्में बनाना बंद कर दिया था... Continue Reading →

Swami (1977): प्रेम का धागा पति से टूटे या प्रेमी से?

सत्तर के दशक में बासु दा बहुत तेज रफ्तार से फिल्में बनाते थे और उनकी उस दौरान बनायी गयी फिल्मों की गुणवत्ता सराहनीय है। सत्तर के दशक की उनकी फिल्में बार बार देखी जाती हैं और तब भी न तो... Continue Reading →

Peepli Live(2010): न्यू इंडिया और इसके मीडिया के मुँह पर तमाचा लगाता गरीब देहाती हिन्दुस्तान

प्रसिद्ध कवि रामावतार त्यागी की एक कविता की पंक्त्तियाँ हैं जी रहे हो जिस कला का नाम ले ले कुछ पता भी है कि वह कैसे बची है? सभ्यता की जिस अटारी पर खड़े हो, वही हम बदनाम लोगों ने... Continue Reading →

Life Goes On (2009) : यादों और सांस्कृतिक टकराव के चक्रव्यूह

चरित्रचित्रण की ऐसी बारीकियों पर ध्यान नहीं दिया गया है। फिल्म को RED कैमरे के द्वारा शूट किया गया और सिनेमेटोग्राफर Robert Shacklady के कैमरे ने लंदन में फिल्माए भागों को खूबसूरती से पकड़ा है। एक अंतर जो दिखता है... Continue Reading →

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