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Cinema, Theatre, Music & Literature

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Koshish

गुलज़ार : नीली नदी के परे गीला सा चांद खिल गया

हिंदी सिनेमा की नदी में तैरते बहते एक दिन “अचानक” यूँ हो जाता है कि व्यक्ति का “परिचय” सतरंगी छटाएं बिखेरते श्वेत-धवल “लिबास” पहने एक संजीदा कलाकार के अनूठे रचनात्मक संसार से हो जाता है और वहां से आगे वह... Continue Reading →

Koshish (1972) : संवेदना उकेरती मौन प्रेमकथा

 लूला, लंगड़ा, टुंडा, गूंगा, बहरा, काना, अंधा   कहकर गाली देते हैं, अपमानित करने के लिए, अपने ही जैसे पूर्ण देह वाले इंसानों को लोग| पहले जिन्हें अपंग, विकलांग आदि कहती थीं, सरकारी परिभाषाएँ, अब “अपूर्ण अंगों” में किसी प्रकार... Continue Reading →

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