कह रहा है शोर-ए-दरिया से समुंदर का सुकूतजिस का जितना ज़र्फ़ है उतना ही वो ख़ामोश है ~ नातिक़ लखनवी ये ढाई किलो का हाथ जब किसी पर पड़ता है तो आदमी उठता नहीं उठ जाता है| चिड़ियाघर में पिंजरे... Continue Reading →
हिंदी सिनेमा में तवायफों के जीवन को हमेशा ही बहुत ग्लैमराइज़ किया गया था| श्याम बेनेगल ने हिंदी सिनेमा के उस तरीके से उलट 1983 में मंडी बनाकर प्रदर्शित कर दी और इसे देखना तवायफों का जीवन श्याम बेनेगल की... Continue Reading →
इरफ़ान खान ने अपने फ़िल्मी जीवन में तरह तरह की भूमिकाएं निभाईं हैं जिनकी खूब चर्चाएँ होती रही हैं| लेकिन उनकी एक फ़िल्म - तुलसी की मुश्किल से ही चर्चा होती है जबकि इरफ़ान ने इसके एक सीक्वेंस में अपने... Continue Reading →
Recent Comments