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leela mishra

Saudagar (1973): चाहत भी जब व्यापार बन जाये

नारी बिचारी है पुरुष की मारी है तन से क्षुधित है मन से मुदित है लपककर झपककर अंत में चित्त है (रघुवीर सहाय) पतझड़ को ही मौसम की स्थायी अवस्था मानकर विधवा माजू बी (नूतन) किसी तरह जीवन काट रही... Continue Reading →

हे मैने कसम ली: मधुमास के सौन्दर्य का प्रतिनिधि गीत

गीत फिल्म बनाने के लिये कतई जरुरी नहीं हैं, न अच्छी फिल्म बनाने के लिये और न सामान्य स्तर वाली या एक बुरी फिल्म बनाने के लिये। ये और बात है कि 40 के दशक से ही हिन्दी फिल्मों में... Continue Reading →

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