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Premchand

Mirza Ghalib (1988-89): अव्यवहारिक एवं दुनियादारी में लापरवाह ग़ालिब धोखे और दुर्भाग्य के घेरे में (अध्याय 4)

ग़ालिब पारंपरिक रूप से धार्मिक नहीं हैं और न ही जड़ता ने उनके दिलो दिमाग पर कोई असर ही डाला है| अपने एक हिन्दू मित्र के घर अन्य हिन्दू साथियों के संग वे दीवाली के अवसर पर चौसर खेल रहे... Continue Reading →

Jagte Raho (1956): न जागा है न जागेगा “भारत”

...[राकेश] https://youtu.be/S3Lhs8HEC_I?si=633obFDq1l4icFzN

Well Done Abba (2010): गरीबी और सिलिकॉन इम्प्लान्ट्स के बाजार के बीच फंसे देश की हास्यास्पद स्थिति

“वेल डन अब्बा“ अभाव और समृद्धि के निर्लज्ज प्रदर्शन के दो विरोधी पाटों के बीच पिसते भारत पर व्यंग्य करती एक कहानी को दिखाती है। श्याम बेनेगल इस फिल्म में भ्रष्ट भारतीय समाज में समस्यायों से दो चार होते एक... Continue Reading →

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